जौनपुर, उत्तर प्रदेश: क्या अध्यात्म के नाम पर केवल शांति का दिखावा होता है या वास्तव में पूर्ण परमात्मा की भक्ति से असाध्य रोग और संकट दूर हो सकते हैं? उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के निवासी अजीत दास का अनुभव इसी गहरे सवाल का जवाब देता है। जौनपुर के अजीत दास की कहानी आज उन हजारों लोगों के लिए एक नई किरण बनकर उभरी है, जो भक्ति तो कर रहे हैं लेकिन उनके दुखों का अंत नहीं हो रहा।
19 वर्षों का संघर्ष और आध्यात्मिक असमंजस
अजीत दास जी का जीवन साल 2000 से लेकर 2019 तक एक अलग ही कशमकश में बीता। वे लगभग दो दशकों तक निरंकारी मिशन से जुड़े रहे, नाम दीक्षा ली और नियमित सत्संग में जाते रहे। लेकिन विडंबना यह थी कि इस दौरान उनका परिवार ‘भूत-प्रेत बाधा’ और ‘आर्थिक तंगी’ से बुरी तरह टूट गया। अजीत जी बताते हैं कि जब वे अपने आध्यात्मिक गुरुओं के पास अपनी व्यथा लेकर जाते थे, तो उन्हें समाधान के बजाय यह कहा जाता था कि ऐसी शक्तियों का कोई अस्तित्व ही नहीं होता। जबकि हकीकत में उनका पूरा परिवार हर रात इन अदृश्य शक्तियों के खौफ में जीता था।
यूट्यूब और भविष्यवाणियों का वो निर्णायक मोड़
निराशा के दौर में जब अजीत दास ने सच्चे दिल से परमात्मा को पुकारा, तब उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। उन्होंने यूट्यूब पर विश्व प्रसिद्ध भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस और फ्लोरेंस की भविष्यवाणियों का विश्लेषण देखा, जिसमें भारत के एक महान संत (World Leader) के बारे में बताया गया था। उस वीडियो ने उन्हें संत रामपाल जी महाराज के अद्भुत आध्यात्मिक ज्ञान से परिचित कराया। अजीत जी ने जब महाराज जी के वचनों को वेदों, पवित्र गीता, कुरान और बाइबिल से मिलाया, तो उन्हें समझ आया कि अब तक वे जिस मार्ग पर थे, वह शास्त्र सम्मत नहीं था।
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चमत्कार: जब विज्ञान के हाथ खड़े हुए, तब सतभक्ति ने दिखाया रास्ता
6 अक्टूबर 2019 को संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के बाद जौनपुर के अजीत दास की कहानी में सफलताओं और लाभों का सिलसिला शुरू हो गया:
- भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति: बरसों पुराना खौफ और मानसिक प्रताड़ना भक्ति शुरू करते ही समाप्त हो गई।
- कैंसर पर विजय: अजीत जी की माता जी को कैंसर था, उनकी स्थिति इतनी नाजुक थी कि पूरा शरीर काला पड़ चुका था। लेकिन महाराज जी के चरणों में अरदास और शास्त्र सम्मत भक्ति के प्रभाव से आज वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
- 9.3 एमएम की पथरी हुई गायब: उनके पिता जी की किडनी में 9.3 एमएम का स्टोन था, जिस पर कोई दवा काम नहीं कर रही थी। महाराज जी की शरण में आने के मात्र 2 महीने बाद ही पथरी बिना किसी ऑपरेशन के अपने आप खत्म हो गई।
- बेजुबान की रक्षा: यहाँ तक कि उनकी पालतू भैंस, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित करने जैसी स्थिति बता दी थी, वह भी अरदास के मात्र 2 घंटे के भीतर स्वस्थ होकर चारा खाने लगी।
निष्कर्ष
जौनपुर के अजीत दास की कहानी महज़ एक अनुभव नहीं, बल्कि इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब पूर्ण परमात्मा का रास्ता खुलता है। भयंकर भूत-प्रेत बाधा, माता जी का कैंसर और पिता जी की किडनी में पथरी जैसी समस्याओं के बाद मौत के मुँह से वापस लौटकर आना विज्ञान की समझ से परे हो सकता है, लेकिन सतभक्ति के मार्ग पर यह संभव है। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान और आशीर्वाद ने अजीत दास और उनके परिवार को एक नया, स्वस्थ और खुशहाल जीवन दान दिया है।
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अजीत दास जी की तरह ही, हजारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की सतभक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व और चमत्कारी बदलाव महसूस किए हैं। सालों पुरानी असाध्य बीमारियों का बिना किसी महँगी दवाई के पूरी तरह ठीक होना, प्रेत बाधाओं का समाप्त होना और जीवन की हर समस्या का समाधान होना यह प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हर असंभव कार्य संभव हो सकता है।
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FAQS
1. जौनपुर के अजीत दास को सतभक्ति से क्या लाभ मिले?
अजीत दास को भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिली। साथ ही, उनके पिता की किडनी की पथरी और माता जी का कैंसर संत रामपाल जी महाराज की शास्त्र सम्मत भक्ति से पूरी तरह ठीक हुआ।
2. क्या संत रामपाल जी महाराज की भक्ति से बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं?
हाँ, अजीत दास की कहानी इसका प्रमाण है। मर्यादा में रहकर सतभक्ति करने से कैंसर और पथरी जैसी असाध्य बीमारियाँ भी परमात्मा की दया से बिना किसी ऑपरेशन के ठीक हो सकती हैं।
3. संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकते हैं?
नाम दीक्षा के लिए आप उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर सत्संग देख सकते हैं या स्क्रीन पर दिए गए आश्रम के नंबरों पर संपर्क करके अपने नजदीकी नाम-दान केंद्र की जानकारी ले सकते हैं।
