जीवन में जब इंसान हर तरफ से हार जाता है और उसे मौत के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखता, तब भगवान किसी न किसी रूप में उसकी मदद करने जरूर आते हैं। ऐसी ही एक कहानी उत्तराखंड के काशीपुर (जिला उधमसिंह नगर) के रहने वाले अखिलेश चौहान की है। एक समय था जब नशा उनके जीवन को बर्बाद कर चुका था, लेकिन आज वे एक नई और सुखद जिंदगी जी रहे हैं।
नशे का वो काला दौर
अखिलेश चौहान पेंटिंग और ठेकेदारी का काम करते थे। लेकिन उनकी सबसे बड़ी समस्या शराब का नशा थी। वे बताते हैं कि शाम के पांच बजते ही उन्हें शराब की ऐसी तलब लगती थी कि वे खुद को रोक नहीं पाते थे। वे पानी की तरह शराब पीते थे और नशे की हालत में कई बार खुदकुशी करने की कोशिश भी की।
नशे के कारण ही एक बार वे अपनी छत से नीचे कूद गए। इस भयानक हादसे में उनके दोनों पैर और रीढ़ की हड्डी पूरी तरह टूट गई। अगले चार साल तक वे लंगड़ाकर चलने को मजबूर रहे। उनका वजन घटकर सिर्फ पैंतीस किलो रह गया था और शरीर में खून की भारी कमी हो गई थी।
राम रहीम के आश्रम में भी नहीं मिला समाधान
अखिलेश अपना नशा छोड़ना चाहते थे, इसके लिए वे साल दो हजार छह में राम रहीम (सिरसा) के पास भी गए। वहां उन्होंने नाम भी लिया और कई तरह की साधनाएं कीं, लेकिन उनका नशा नहीं छूटा। वे बताते हैं कि वे आश्रम के अंदर भी छिपकर नशा करते थे क्योंकि उनके अंदर की इच्छाशक्ति पूरी तरह मर चुकी थी।
जीने की राह और संत रामपाल जी महाराज का सहारा
अखिलेश के जीवन में बदलाव तब आया जब उनके मामा वीरेंद्र सिंह चौहान को चंडीगढ़ में ‘ज्ञान गंगा’ नाम की एक पुस्तक मिली। उस किताब को पढ़कर उन्हें पता चला कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति से असाध्य रोग भी ठीक हो सकते हैं। जब उनके मामा की पत्नी की पथरी बिना किसी ऑपरेशन के सिर्फ गुरु जी की दया से ठीक हो गई, तो अखिलेश को भी एक उम्मीद नजर आई।
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सात फरवरी दो हजार तेरह: एक नया जीवन
अखिलेश ने सात फरवरी दो हजार तेरह को संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ली। इसके बाद उनके जीवन में जो बदलाव आए, वे किसी चमत्कार से कम नहीं थे:
- नशे से आजादी: जिस नशे को छोड़ने के लिए अखिलेश सालों से तड़प रहे थे, वह गुरु जी के मंत्रों के जाप से अपने आप छूट गया। आज वे हर तरह के नशे से कोसों दूर हैं।
- टूटी हड्डियों का जुड़ना: चार साल तक लंगड़ाकर चलने के बाद, गुरु जी की शरण में आते ही उनके पैरों और रीढ़ की हड्डी का दर्द गायब हो गया और वे फिर से सामान्य रूप से चलने लगे।
- बेहतर स्वास्थ्य: पैंतीस किलो के अखिलेश का वजन अब पैंसठ किलो है और वे अब तक चार बार दूसरों को रक्तदान भी कर चुके हैं।
काशीपुर के उस हैंडपंप का चमत्कार
अखिलेश ने अपने अनुभव में एक और बड़ी बात बताई। उनके घर के पास पानी की बहुत किल्लत थी। सभी मिस्त्रियों ने जवाब दे दिया था कि यहाँ पानी नहीं निकल सकता। लेकिन गुरु जी से प्रार्थना करने के बाद वहां एक ऐसा हैंडपंप लगा, जो आज भी पूरे मोहल्ले को मीठा पानी पिलाता है। यह नल आज भी काशीपुर (पूर्वी बिहार) में उनके घर पर मौजूद है।
अखिलेश का समाज को संदेश
आज अखिलेश चौहान और उनकी माता सुशीला बहुत खुश हैं। अखिलेश कहते हैं कि नशा इंसान खुद नहीं करता, बल्कि कुछ बुरी शक्तियां उससे करवाती हैं। अगर आप अपने परिवार को खुश देखना चाहते हैं और एक सम्मानजनक जीवन जीना चाहते हैं, तो संत रामपाल जी महाराज की शरण में आकर भक्ति शुरू करें।
निष्कर्ष
अखिलेश चौहान की यह कहानी महज़ एक अनुभव नहीं, बल्कि इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब पूर्ण परमात्मा का रास्ता खुलता है। भयंकर नशे की लत, टूटी हुई हड्डियाँ और यहाँ तक कि आत्महत्या की कोशिशों के बाद मौत के मुँह से वापस लौटकर आना विज्ञान की समझ से परे हो सकता है, लेकिन सतभक्ति के मार्ग पर यह संभव है। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान और आशीर्वाद ने अखिलेश चौहान और उनके परिवार को एक नया, स्वस्थ और खुशहाल जीवन दान दिया है।
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अखिलेश चौहान जी की तरह ही, हजारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की सतभक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व और चमत्कारी बदलाव महसूस किए हैं। सालों पुराने नशे का बिना किसी दवाई के पूरी तरह ठीक होना, गंभीर चोटों का समाप्त होना और जीवन की हर समस्या का समाधान होना यह प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हर असंभव कार्य संभव हो सकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के बाद नशा अपने आप छूट जाता है?
हाँ, अखिलेश चौहान के अनुसार, जब भक्त मर्यादा में रहकर सतभक्ति और मंत्रों का जाप करते हैं, तो सालों पुराना नशा और बुरी आदतें बिना किसी दवाई के अपने आप छूट जाती हैं।
2. गंभीर चोटों और हड्डियों के फ्रैक्चर में भक्ति से कैसे लाभ मिला?
अखिलेश की रीढ़ की हड्डी और पैर टूट चुके थे। संत रामपाल जी की शरण में आने और सतभक्ति करने से उनकी शारीरिक स्थिति में चमत्कारिक सुधार हुआ और वे फिर से चलने लगे।
3. संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ली जा सकती है?
नाम दीक्षा के लिए आप उनके सत्संग कार्यक्रमों में दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं या उनकी वेबसाइट और नजदीकी नाम दान केंद्रों पर जाकर निःशुल्क दीक्षा ले सकते हैं।
