इंसान की ज़िंदगी में कई बार ऐसे मोड़ आते हैं जब विज्ञान, पैसा और दुनिया के सारे सहारे खत्म हो जाते हैं। ऐसे में सिर्फ एक ही चीज़ बचती है—सच्ची श्रद्धा और पूर्ण परमात्मा का चमत्कार। यह कहानी है बिहार राज्य के मधेपुरा जिले के रहने वाले बृजेश कुमार की। एक ऐसा व्यक्ति जिसने न सिर्फ गरीबी और भयंकर नशे का दंश झेला, बल्कि मौत को भी बहुत करीब से मात दी।
संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने से पहले, बृजेश कुमार एक आम इंसान की तरह हनुमान जी, गणेश जी और दुर्गा माता की पूजा किया करते थे। लेकिन, इन सबके बावजूद उनके जीवन से दुख और परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही थीं। फिर उनके जीवन में एक ऐसा चमत्कार हुआ, जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया।
सोनीपत की वह यात्रा जिसने बदल दी ज़िंदगी
रोज़ी-रोटी की तलाश में बृजेश कुमार हरियाणा के सोनीपत शहर में मज़दूरी करने गए थे। वहाँ उनकी मुलाकात उनके जीजा जी से हुई। उन्होंने बृजेश कुमार को संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने की सलाह दी।
शुरुआत में बृजेश कुमार को इस बात पर बिल्कुल यकीन नहीं हुआ। लेकिन जब उन्होंने गुरु जी की एक आध्यात्मिक पुस्तक पढ़ी—जिसमें कैंसर ठीक होने और आँखों की रोशनी वापस आने जैसे चमत्कारों का ज़िक्र था—तो उनकी दिलचस्पी बढ़ गई। महज़ चार दिन में उन्होंने वह पूरी किताब पढ़ ली। परमात्मा से मिलने की तीव्र इच्छा उन्हें बरवाला आश्रम ले गई, जहाँ 5 सितंबर 2014 को उन्होंने विधिवत रूप से नाम दीक्षा प्राप्त की।
भयंकर नशा और किडनी की बीमारी का हुआ अंत
नाम दीक्षा लेने के बाद बृजेश कुमार के जीवन में चमत्कारों की झड़ी लग गई:
- नशे से तुरंत आज़ादी: बृजेश कुमार को बीड़ी और गुटखे की बहुत भयंकर लत थी। कई मंदिरों में कसमें खाने के बाद भी यह लत नहीं छूटी थी। लेकिन संत रामपाल जी महाराज की शरण में आते ही, वह एक झटके में पूरी तरह से नशा मुक्त हो गए।
- पत्नी की किडनी का रोग खत्म: एक बार उनकी पत्नी की किडनी में गंभीर सूजन आ गई। डॉक्टरों ने कह दिया था कि यह आसानी से ठीक नहीं होगा। गरीबी के कारण उनके पास इलाज के पैसे भी नहीं थे। तब बृजेश कुमार ने सच्चे मन से अपने गुरु से प्रार्थना की और श्रद्धापूर्वक पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट को जला दिया। यह किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं था कि उसी दिन से उनकी पत्नी का रोग हमेशा के लिए ठीक हो गया और आज 5 साल बाद भी वह बीमारी लौट कर नहीं आई।
टूटी हड्डी का बिना ऑपरेशन जुड़ना
एक अन्य घटना में जब उनकी पत्नी का हाथ टूट गया, तो बृजेश कुमार ने फिर से अपने गुरु से प्रार्थना की। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि अगर संत रामपाल जी महाराज तुम्हारी हड्डी जोड़ देंगे, तो तुम्हें भी नाम दीक्षा लेनी होगी।
जब वे डॉक्टर के पास गए और एक्स-रे करवाया, तो डॉक्टर भी हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ा फ्रैक्चर नहीं बल्कि मामूली चोट है और अपने आप ठीक हो जाएगी। एक महीने के भीतर हाथ पूरी तरह ठीक हो गया, जिसके बाद उनकी पत्नी ने भी खुशी-खुशी नाम दीक्षा ले ली।
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जब आत्मा पहुँची धर्मराज लोक: मौत को भी दी मात
सबसे रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना साल 2016 में घटी। बृजेश कुमार ने गलती से ज़हर पी लिया था। उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उनकी आत्मा शरीर से बाहर निकलकर सीधे धर्मराज लोक पहुँच गई।
वहाँ उन्होंने अपनी आँखों से स्वर्ग और नर्क देखे। उसी वक्त वहाँ संत रामपाल जी महाराज प्रकट हुए। गुरु जी के सम्मान में स्वयं धर्मराज अपनी कुर्सी से खड़े हो गए। गुरु जी ने बृजेश कुमार को बताया कि यह उनके किसी पिछले जन्म का भयानक पाप कर्म था, लेकिन पूर्ण गुरु की शरण में होने के कारण वह मौत का कर्म कट गया है।
इसके बाद उनकी आत्मा को वापस शरीर में भेज दिया गया। जब बृजेश कुमार को होश आया और वह जीवित बच गए, तो इलाज कर रहे डॉक्टर भी हैरान रह गए और उन्होंने इसे साक्षात ईश्वर का चमत्कार माना।
बृजेश कुमार का युवाओं के लिए एक खास संदेश
आज बृजेश कुमार एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी रहे हैं। जो लोग टीवी या इंटरनेट पर यह कहानी पढ़ रहे हैं और नाम दीक्षा लेना चाहते हैं, उनके लिए बृजेश कुमार का एक बेहद खास संदेश है:
“आज कई टीवी चैनलों पर संत रामपाल जी महाराज के सत्संग प्रसारित हो रहे हैं। टीवी स्क्रीन पर नीचे एक पीली पट्टी आती है जिसमें संपर्क नंबर दिए गए होते हैं। उन नंबरों पर SMS करके आप मुफ्त में ‘ज्ञान गंगा’ पुस्तक घर बैठे मंगवा सकते हैं। मेरा विशेष रूप से युवा वर्ग से निवेदन है कि वे इस सच्चे ज्ञान को समझें और अपना कल्याण करवाएं, क्योंकि यह अनमोल मनुष्य जन्म बार-बार नहीं मिलता।”
निष्कर्ष
बृजेश कुमार की यह कहानी महज़ एक अनुभव नहीं, बल्कि इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जब इंसान के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब पूर्ण परमात्मा का रास्ता खुलता है। गरीबी, बीमारी और यहाँ तक कि मौत के मुँह से वापस लौटकर आना विज्ञान की समझ से परे हो सकता है, लेकिन सतभक्ति के मार्ग पर यह संभव है। संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान और आशीर्वाद ने बृजेश कुमार और उनके परिवार को एक नया, स्वस्थ और खुशहाल जीवन दान दिया है।
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बृजेश कुमार जी की तरह ही, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की सतभक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व और चमत्कारी बदलाव महसूस किए हैं। उनकी पत्नी की किडनी की लाइलाज बीमारी का बिना पैसे के पूरी तरह ठीक होना, भयंकर नशे की लत का समाप्त होना और खुद मौत के मुँह (ज़हर पीने के बाद धर्मराज लोक) से वापस लौटना यह प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हर असंभव कार्य संभव हो सकता है।
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FAQs: जहर पीने के बाद मौत के मुँह से वापसी
प्रश्न 1: जहर पीने के बाद बृजेश कुमार की जान कैसे बची?
उत्तर: जब बृजेश कुमार ने गलती से जहर पी लिया था, तब संत रामपाल जी महाराज ने धर्मराज लोक में दर्शन देकर उनके पाप कर्म काटे और उन्हें नया जीवनदान दिया।
प्रश्न 2: बृजेश कुमार की पत्नी की किडनी की बीमारी कैसे ठीक हुई?
उत्तर: बृजेश कुमार ने संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना की और पूर्ण श्रद्धा के साथ पत्नी की मेडिकल रिपोर्ट जला दी। उसी दिन से उनकी किडनी की बीमारी हमेशा के लिए खत्म हो गई।
प्रश्न 3: संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकते हैं?
उत्तर: आप टीवी पर संत रामपाल जी महाराज का सत्संग देखकर स्क्रीन पर दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा आप मुफ्त ‘ज्ञान गंगा’ पुस्तक भी मंगवा सकते हैं।
