B.Pharma, M.Ed, कॉलेज संचालक की कहानी: भाई का ब्रेन ट्यूमर ठीक हुआ, हुए परमात्मा के साक्षात दर्शन!

B.Pharma, M.Ed, कॉलेज संचालक की कहानी: भाई का ब्रेन ट्यूमर ठीक हुआ, हुए परमात्मा के साक्षात दर्शन!

जब एक विज्ञान का छात्र और उच्च शिक्षित व्यक्ति, जिसके पास B.Pharma, M.Sc, B.Ed, और M.Ed जैसी डिग्रियाँ हों, यह कहे कि उसे असली ज्ञान और शांति भौतिक शिक्षा से नहीं बल्कि आध्यात्मिक शिक्षा से मिली, तो यह बात हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती है।

यह कहानी है मध्य प्रदेश के भिंड निवासी श्री विजय पाल सिंह नरवरिया जी की, जो आज दो-दो कॉलेजों के संचालक हैं। उनकी यात्रा विज्ञान और तर्क से शुरू होकर विश्वास और साक्षात अनुभव पर समाप्त होती है।

आप विजय पाल जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।

एक शिक्षित मन की अधूरी खोज

कॉलेज संचालक होने से पहले विजय पाल जी भी आम लोगों की तरह ब्रह्मा, विष्णु, महेश और दुर्गा जी की पूजा करते थे, व्रत रखते थे। लेकिन उनके मन में हमेशा एक सवाल खटकता था – “पूर्ण परमात्मा कौन है? वह कहाँ रहता है और कैसे मिलेगा?” इस सवाल का जवाब उन्हें कहीं नहीं मिल रहा था।

उनकी यह खोज तब और तीव्र हो गई जब उनके बड़े भाई, जो एक टीचर हैं, को ब्रेन ट्यूमर हो गया। जब वे अपने भाई को दिल्ली के बड़े हस्पताल में दिखाने ले गए, तो डॉक्टर ने साफ़ कह दिया, “मैं तो केवल इलाज कर सकता हूँ, लेकिन जान बचाना परमात्मा के हाथ में है।”

डॉक्टर के इन शब्दों ने विजय पाल जी को पूर्ण परमात्मा की खोज के लिए और भी दृढ़ कर दिया।

एक पुस्तक जिसने दिखाई नई राह

उसी संकट के समय में, उनके गाँव के ही संत रामपाल जी महाराज के एक अनुयायी ने उन्हें “भक्ति सौदागर को संदेश” नामक एक पुस्तक दी। विजय पाल जी बताते हैं कि उस पुस्तक को पढ़कर उन्हें अपने सभी सवालों के जवाब मिल गए। उन्होंने तुरंत संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेने का निश्चय किया।

भक्ति से मिले वो लाभ जो विज्ञान से परे थे

नाम दीक्षा लेने के बाद विजय पाल जी और उनके परिवार के जीवन में चमत्कारों की एक ऐसी श्रृंखला शुरू हुई, जिसे विज्ञान भी नहीं समझा सकता।

1. भाई को ब्रेन ट्यूमर से मिला जीवनदान

उनके भाई ब्रेन ट्यूमर की तीसरी स्टेज पर थे। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के बाद भी याददाश्त जाने और शरीर के पैरालाइज होने का खतरा बताया था। लेकिन संत रामपाल जी महाराज की दया से आज वह बिलकुल स्वस्थ हैं और भक्ति कर रहे हैं।

2. सायटिका और पथरी का दर्द बिना ऑपरेशन खत्म

विजय पाल जी को खुद सायटिका (Sciatica) का भयंकर दर्द था, जिसके लिए डॉक्टरों ने ऑपरेशन ही एकमात्र उपाय बताया था। लेकिन उन्होंने केवल आश्रम में प्रार्थना लगाई और आज वह दर्द पूरी तरह से गायब है। इसी तरह उनकी किडनी की पथरी भी केवल प्रार्थना करने के बाद यूरिन के रास्ते अपने आप निकल गई।

3. नौकरी करने वाला बना दो कॉलेजों का मालिक

विजय पाल जी बताते हैं कि नाम दीक्षा से पहले वह दूसरों की संस्थाओं में छोटी-मोटी नौकरी करते थे। लेकिन संत रामपाल जी से जुड़ने के बाद परमात्मा ने ऐसी कृपा की कि आज उनका खुद का D.El.Ed कॉलेज और एक ITI कॉलेज है।

4. हुए पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब के साक्षात दर्शन

शुरुआत में शास्त्रों से ज्ञान मिलाने के बाद भी विजय पाल जी को 100% विश्वास नहीं हो पा रहा था। वह बताते हैं, “एक दिन सुबह 4 बजे, जब मैं सोया हुआ था, तो स्वयं कबीर परमात्मा मेरे पलंग से तीन-चार फ़ीट ऊपर हवा में प्रकट हो गए। इतना प्रकाश था कि मेरी आँखें खुल गईं। परमात्मा ने कहा, ‘बेटा, अभी भी विश्वास नहीं हो रहा?’ उस दिन के बाद मेरा विश्वास ऐसा दृढ़ हुआ कि अब कोई उसे डिगा नहीं सकता।”

एक कॉलेज संचालक का समाज को संदेश

विजय पाल जी कहते हैं, “मैं विज्ञान का छात्र रहा हूँ, लेकिन जो शांति और लाभ मुझे आध्यात्मिक शिक्षा से मिले, वो भौतिक शिक्षा से कभी नहीं मिल सकते। मैं पढ़े-लिखे समाज से प्रार्थना करता हूँ कि वे संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को सुनें, उसे शास्त्रों से मिलाएँ और फिर अपने जीवन में उतारकर देखें। आपके सारे ज्ञान-चक्षु खुल जाएँगे।”

और सच्ची कहानियाँ पढ़ें

विजय पाल जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।

FAQ

प्रश्न 1: एक उच्च शिक्षित व्यक्ति होने के बावजूद विजय पाल जी को गुरु की शरण में क्यों जाना पड़ा?

उत्तर: उनके भाई को ब्रेन ट्यूमर हो गया था और डॉक्टरों के जवाब देने के बाद, उन्हें पूर्ण परमात्मा की खोज हुई जो उन्हें संत रामपाल जी महाराज की शरण में ले आई।

प्रश्न 2: संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान अन्य संतों से अलग कैसे है?

उत्तर: विजय पाल जी के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान हमारे पवित्र सदग्रंथों (जैसे वेद, गीता, पुराण) से मेल खाता है, जबकि अन्य संतों का ज्ञान मनमाना और शास्त्र-विरुद्ध होता है।

प्रश्न 3: कोई व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान की सच्चाई को कैसे परख सकता है?

उत्तर: विजय पाल जी स्वयं उदाहरण देते हैं कि उन्होंने बाज़ार से शास्त्र खरीदकर और महीनों तक संत रामपाल जी के सत्संग से उनका मिलान करके ज्ञान को परखा। कोई भी पढ़ा-लिखा व्यक्ति इसी तरह सच्चाई की जाँच कर सकता है।

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