सीआरपीएफ ऑफिसर की कहानी

सीआरपीएफ ऑफिसर की आपबीती: 40 साल का नशा और लाइलाज बीमारी को भक्ति से दी मात

सीआरपीएफ ऑफिसर की कहानी: इंसान जब चारों तरफ से मुसीबतों से घिर जाता है, तभी उसे परमात्मा का असली सहारा मिलता है। आज की कहानी देहरादून, उत्तराखंड के रहने वाले तुलसी सिंह तोमर जी की है। तुलसी जी सीआरपीएफ से रिटायर्ड हैं, लेकिन उनकी असली लड़ाई रिटायरमेंट के बाद नहीं, बल्कि घर की बीमारियों और अपनी बुरी आदतों से थी।

दवाइयों का ढेर और एम्बुलेंस के चक्कर

तुलसी जी बताते हैं कि उनका परिवार सालों से शारीरिक और आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उनकी पत्नी को रीढ़ की हड्डी (Spine Problem) की गंभीर समस्या थी। हालत इतनी खराब थी कि उन्हें स्ट्रेचर पर लिटाकर एम्बुलेंस के जरिए पीजीआई चंडीगढ़ और देहरादून के बड़े अस्पतालों में ले जाना पड़ता था। डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए थे और केवल कैल्शियम की गोलियों पर रहने की सलाह दी थी। घर में सुकून नाम की कोई चीज नहीं थी और पैसा पानी की तरह बह रहा था।

सीआरपीएफ ऑफिसर की कहानी

40 साल पुराना नशा: एक अटूट जंजीर

तुलसी जी की एक और बड़ी समस्या थी उनका नशा। मात्र 13-14 साल की उम्र से उन्हें तम्बाकू, बीड़ी और शराब की ऐसी लत लगी कि वह उसे कभी छोड़ नहीं पाए। वह बताते हैं, “मैं बीड़ी छोड़ना चाहता तो तम्बाकू खाने लगता, और तम्बाकू छोड़ता तो बीड़ी पी लेता। शराब और मांस तो हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके थे।”

ज्ञान गंगा पुस्तक से मिला सत्य मार्ग

तुलसी जी के जीवन में बदलाव तब आया जब उनके एक पड़ोसी ने उन्हें ज्ञान गंगा पुस्तक दी। एक शिक्षित व्यक्ति होने के नाते उन्होंने इस ज्ञान को आंख मूंदकर नहीं माना। उन्होंने 8 महीने तक गीता, वेदों और सूक्ष्मवेद के साथ इस ज्ञान का मिलन किया। जब उन्हें यकीन हो गया कि यह ज्ञान शत-प्रतिशत हमारे पवित्र शास्त्रों के अनुकूल है, तब उन्होंने नाम दीक्षा लेने का मन बनाया।

परमात्मा को आजमाया और हुआ चमत्कार

तुलसी जी के मन में डर था कि वे नशे के कारण भक्ति के नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे। उन्होंने मन ही मन संत रामपाल जी महाराज को याद किया और कहा, “हे पूर्ण परमात्मा, अगर आप सच में वही सामर्थ्यवान गुरु हैं, तो मेरा यह नशा छुड़वा दीजिए, तभी मैं आपकी शरण में आऊंगा।”

हैरानी की बात यह थी कि बिना किसी दवा के, केवल 15-20 दिनों के भीतर उनका दशकों पुराना नशा खुद-ब-खुद छूट गया। इसके बाद 16 नवंबर 2018 को उन्होंने संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ली।

भक्ति की शक्ति: पत्नी को मिला नया जीवन

नाम दीक्षा लेने के बाद चमत्कार रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उनकी पत्नी, जो रीढ़ की हड्डी की बीमारी के कारण बिस्तर से उठ नहीं पाती थीं, वह संत रामपाल जी की भक्ति और मर्यादा का पालन करने से आज पूरी तरह स्वस्थ हैं। तुलसी जी कहते हैं कि उनके परिवार को अब तक तीन बार जीवनदान मिल चुका है और आज वे एक सुखी जीवन जी रहे हैं।

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तुलसी सिंह तोमर जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। उनके जीवन के 40 साल पुराने नशे और पत्नी की लाइलाज बीमारी न केवल खत्म हुई, बल्कि उन्हें एक नई और सुखद जिंदगी मिली है।

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निष्कर्ष: नशा मुक्त समाज की प्रेरणा

आज तुलसी जी एक गर्वित पूर्व फौजी के साथ-साथ एक सुखी और नशा-मुक्त इंसान हैं। वे कहते हैं कि जो लोग नशे और बीमारी से तंग आ चुके हैं, उन्हें एक बार संत रामपाल जी महाराज की शरण में जरूर आना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. तुलसी सिंह तोमर का नशा कैसे छूटा?

तुलसी सिंह जी का 40 साल पुराना नशा बिना किसी दवा के, केवल संत रामपाल जी महाराज की भक्ति और उनके बताए नियमों का पालन करने के दृढ़ संकल्प से छूटा।

2. क्या उनकी पत्नी की बीमारी पूरी तरह ठीक हो गई?

हाँ, डॉक्टरों और पीजीआई चंडीगढ़ से जवाब मिलने के बाद, उनकी पत्नी की रीढ़ की हड्डी (Spine) की गंभीर समस्या संत रामपाल जी की भक्ति से पूर्णतः ठीक हो गई।

3. क्या शिक्षित व्यक्ति भी इस मार्ग को अपना रहे हैं?

हाँ, तुलसी सिंह तोमर जैसे शिक्षित और पूर्व सीआरपीएफ अधिकारी ने स्वयं पवित्र शास्त्रों से ज्ञान का मिलान करने के बाद ही इस भक्ति मार्ग को अपनाया और लाभ पाया।

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