“अक्सर कहा जाता है कि चिकित्सक दूसरों का जीवन बचाते हैं, परंतु क्या हो जब एक डॉक्टर स्वयं ही मृत्यु के मुख में चला जाए? आज की यह विशेष रिपोर्ट डॉ. राजीव कुमार पाल की सच्ची कहानी है, जो उत्तराखंड के रुद्रपुर निवासी हैं। पेशे से एक निजी अस्पताल के आपातकालीन विभाग में कार्यरत डॉक्टर होने के बावजूद, वह स्वयं नशे के ऐसे जाल में फंस चुके थे जिससे निकलना असंभव लग रहा था। आइए जानते हैं कैसे एक आध्यात्मिक मोड़ ने उनका जीवन बदल दिया।”
नशे के अंधकार में डूबा जीवन
संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने से पूर्व डॉ. राजीव का जीवन अत्यंत कष्टकारी था। एक डॉक्टर होने के बाद भी वह नशे के इस कदर आदी थे कि दिन भर में 3 से 4 डिब्बी सिगरेट पी जाते थे। उनकी सुबह की शुरुआत ही शराब से होती थी।
इस नशे का प्रभाव केवल उनके स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवार पर भी पड़ा। घर में प्रतिदिन कलह होती थी और नशे की स्थिति में वह अपनी पत्नी के साथ मारपीट भी करते थे। उनकी पूरी आय नशे में व्यर्थ हो जाती थी और वह भारी कर्ज के बोझ तले दबे जा रहे थे।
‘ज्ञान गंगा’ पुस्तक ने बदली विचारधारा
डॉ. राजीव की माताजी ने सबसे पहले संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ली थी। उन्होंने ही राजीव को ‘ज्ञान गंगा‘ नामक पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया। जब राजीव ने उस पुस्तक का अध्ययन किया, तो उन्हें ज्ञात हुआ कि नशा करने वाले जीव की मृत्यु के पश्चात क्या दुर्गति होती है। शास्त्रों के इस गूढ़ ज्ञान ने उनके भीतर आत्म-ग्लानि पैदा की और उन्हें नशा त्यागने की सच्ची प्रेरणा मिली।
जब चिकित्सा विज्ञान ने हाथ खड़े कर दिए
अत्यधिक धूम्रपान के कारण डॉ. राजीव के फेफड़ों में मवाद (पस) भर गया था। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कह दिया था कि मवाद पूरी तरह सूखकर चिपक गया है। इसके उपचार के लिए दिल्ली जाकर एक बड़ी ओपन चेस्ट सर्जरी करानी होगी, जो काफी जोखिम भरी और खर्चीली थी।
परंतु राजीव का अटूट विश्वास अपने गुरु संत रामपाल जी महाराज पर था। उन्होंने गुरु जी से प्रार्थना की और शास्त्र अनुकूल भक्ति मर्यादा का पालन शुरू किया।
एक असंभव चमत्कार: बिना बड़ी सर्जरी मिला स्वास्थ्य
जहाँ डॉक्टर बड़े ऑपरेशन की बात कर रहे थे, वहीं एक चमत्कार हुआ। बिना किसी बड़ी सर्जरी के, डॉक्टरों ने केवल एक साधारण नली (Tube) डालकर उनके फेफड़ों से लगभग 3.5 लीटर गाढ़ा मवाद बाहर निकाल दिया। डॉक्टर भी इस सुधार को देखकर आश्चर्यचकित थे। डॉ. राजीव पूरी तरह स्वस्थ हो गए, जो उनके लिए एक नया जीवन मिलने जैसा था।
नाम दीक्षा के पश्चात आया सुखद बदलाव
आज डॉ. राजीव कुमार पाल का जीवन पूरी तरह बदल चुका है:
- पूर्ण नशा मुक्ति: अब वह किसी भी प्रकार के नशे को हाथ भी नहीं लगाते और एक सात्विक जीवन जी रहे हैं।
- आर्थिक समृद्धि: पहले जो पैसा नशे में बर्बाद होता था, अब उनकी आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी है और वह कर्ज मुक्त हैं।
- पारिवारिक शांति: घर में अब झगड़ों की जगह प्रेम, सुख और शांति का वास है।
डॉक्टर का संदेश: परमात्मा की शक्ति अटूट है
एक डॉक्टर होने के नाते राजीव जी का मानना है कि चिकित्सा विज्ञान की सीमा जहाँ समाप्त होती है, वहाँ से परमात्मा की शक्ति का कार्य आरम्भ होता है। वह कहते हैं कि संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई शास्त्र अनुकूल साधना में इतनी शक्ति है कि व्यक्ति की नशे की तलब अपने आप समाप्त हो जाती है।
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निष्कर्ष
डॉ. राजीव कुमार पाल की यह आपबीती हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी बड़ी बुराई या बीमारी क्यों न आ जाए, यदि हमें सही मार्ग और पूर्ण संत का साथ मिल जाए, तो हर अंधकार को मिटाया जा सकता है। एक डॉक्टर, जो स्वयं विज्ञान का ज्ञाता है, उनका यह स्वीकार करना कि परमात्मा की शक्ति चिकित्सा विज्ञान से भी ऊपर है, संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान की सत्यता को प्रमाणित करता है। आज राजीव जी न केवल स्वस्थ हैं, बल्कि उनका परिवार भी खुशहाल है। यह कहानी उन लाखों लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो नशे की दलदल से बाहर निकलना चाहते हैं।
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डॉ. राजीव कुमार पाल जी की तरह ही, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की सतभक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व और चमत्कारी बदलाव महसूस किए हैं। उनके फेफड़ों की लाइलाज बीमारी (मवाद) का बिना किसी बड़ी सर्जरी के पूरी तरह ठीक होना और वर्षों पुरानी नशे की लत का समाप्त होना यह प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हर असंभव कार्य संभव हो सकता है।
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FAQs on डॉ. राजीव कुमार पाल की सच्ची कहानी
1. डॉ. राजीव कुमार पाल कौन हैं?
वे उत्तराखंड के रुद्रपुर निवासी हैं और पेशे से इमरजेंसी डॉक्टर हैं। संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने से पहले वे गंभीर नशे के आदी थे।
2. उनका नशा कैसे छूटा?
‘ज्ञान गंगा’ पुस्तक पढ़ने और संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद, उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान हुआ जिससे उनकी वर्षों पुरानी शराब और सिगरेट की लत स्वतः छूट गई।
3. उनके फेफड़ों की बीमारी कैसे ठीक हुई?
बिना किसी बड़ी ओपन चेस्ट सर्जरी के, परमात्मा की दया से डॉक्टरों ने एक साधारण ट्यूब द्वारा उनके फेफड़ों से 3.5 लीटर मवाद निकाल दिया और वे पूर्ण स्वस्थ हो गए।
