मध्य प्रदेश की सरकारी टीचर गीता नरवरिया, संत रामपाल जी महाराज से मिले लाभों के बारे में बताते हुए।

ब्रेन ट्यूमर का चमत्कारिक इलाज, बेरोजगार पति बना कॉलेज का मालिक: एक सरकारी टीचर की सच्ची कहानी

एक पढ़ी-लिखी सरकारी टीचर, जिसके लिए तर्क और विज्ञान ही सबकुछ था, उसकी ज़िंदगी में ऐसा क्या हुआ कि उसने शास्त्रों और भक्ति के मार्ग को अपना लिया? यह कहानी है मध्य प्रदेश के भिंड जिले की एक सरकारी टीचर गीता नरवरिया जी की, जिन्होंने न केवल आध्यात्मिक सत्य को जाना, बल्कि भक्ति की शक्ति से अपने जीवन में असंभव लगने वाले चमत्कार होते हुए भी देखे।

यह कहानी विश्वास, ज्ञान और एक गुरु द्वारा दिखाए गए सही मार्ग की है।

आप गीता जी की पूरी आपबीती, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।

पूजा-पाठ तो था, पर मन में शांति नहीं थी

संत रामपाल जी महाराज जी से जुड़ने से पहले, गीता जी एक आम हिन्दू परिवार की तरह सभी देवी-देवताओं की पूजा करती थीं। वह बताती हैं, “मैं व्रत रखती थी, मंदिरों में जाती थी, सुबह-सुबह सभी देवी-देवताओं को स्नान कराना, आरती उतारना, दीपक जलाना, वह सारी पूजा मैं करती थी जो एक हिन्दू धर्म में होती है।”

लेकिन एक टीचर होने के नाते उनके मन में हमेशा यह सवाल रहता था कि हम जन्म क्यों लेते हैं और मर क्यों जाते हैं? इस जन्म-मृत्यु के रोग का अंत कैसे होगा? इन पूजाओं से उनका मन संतुष्ट नहीं था।

एक संकट जो वरदान बन गया

गीता जी के जीवन में बदलाव एक बड़े संकट के माध्यम से आया। उनके जेठ जी को ब्रेन ट्यूमर हो गया था और उनकी हालत बहुत गंभीर थी। वह तीसरी स्टेज पर पहुँच चुके थे और डॉक्टर ने कह दिया था कि उनकी याददाश्त जा सकती है या शरीर को लकवा मार सकता है।

उसी दौरान दिल्ली में उनके पति के पास संत रामपाल जी महाराज जी का एक शिष्य आया और उन्हें “भक्ति सौदागर को संदेश” नामक एक पुस्तक दी। गीता जी और उनके पति ने जब वह पुस्तक पढ़ी, तो उनकी आँखें खुल गईं। उन्हें अपने सारे सवालों के जवाब मिल गए। उन्होंने तुरंत संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेने का फैसला किया।

भक्ति की शक्ति से हुए चमत्कार जो विज्ञान को चुनौती देते हैं

नाम दीक्षा लेकर शास्त्र-अनुकूल भक्ति शुरू करने के बाद गीता जी के परिवार में चमत्कारों की झड़ी लग गई।

1. तीसरी स्टेज का ब्रेन ट्यूमर हुआ ठीक

सबसे बड़ा चमत्कार उनके जेठ जी के साथ हुआ। जिस मरीज को डॉक्टरों ने लगभग जवाब दे दिया था, संत रामपाल जी महाराज की दया से आज वह बिलकुल स्वस्थ हैं और उन्होंने भी नाम दीक्षा ले ली है।

2. बेरोजगार पति बने कॉलेज के मालिक

नाम दीक्षा लेने से पहले गीता जी के पति बेरोजगार थे, घर में आर्थिक तंगी थी। लेकिन भक्ति से जुड़ने के बाद परमात्मा ने ऐसी कृपा की कि आज उनका खुद का कॉलेज है।

3. पति को हुए परमात्मा के साक्षात दर्शन

गीता जी के पति को भक्ति पर पूरा विश्वास नहीं हो पा रहा था। तब एक दिन सुबह 4 बजे, कबीर परमेश्वर ने संत रामपाल जी महाराज के रूप में आकर उन्हें साक्षात दर्शन दिए और कहा, “बेटा, तुझे विश्वास नहीं हो रहा? यह पूर्ण परमात्मा ही धरती पर आए हुए हैं, इनसे नाम दीक्षा लो और अपना कल्याण करवाओ।” इस अनुभव के बाद उनका विश्वास अटूट हो गया।

4. जानलेवा हादसे में बाल-बाल बचीं

एक बार गीता जी स्कूटी से स्कूल जा रही थीं और रास्ते में हल्के पानी से उनकी स्कूटी फिसल गई। वह बताती हैं कि स्कूटी बहुत दूर जाकर गिरी, लेकिन वह अपनी जगह पर खड़ी की खड़ी रह गईं और उन्हें एक खरोंच तक नहीं आई।

एक टीचर का पढ़े-लिखे समाज को संदेश

गीता जी कहती हैं, “आज का पढ़ा-लिखा समाज भौतिक शिक्षा में बहुत आगे है, लेकिन आध्यात्मिक शिक्षा की ओर उनका ध्यान ही नहीं गया। संत रामपाल जी महाराज हमें वही आध्यात्मिक ज्ञान दे रहे हैं जो शास्त्रों पर आधारित है। इस साधना से न केवल हमारे जीवन के कष्ट खत्म होते हैं, बल्कि जन्म-मृत्यु का रोग भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।

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गीता जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।

प्रश्न 1: गीता नरवरिया जी को भक्ति मार्ग अपनाने की प्रेरणा कैसे मिली?

उत्तर: उनके जेठ जी को ब्रेन ट्यूमर होने पर उन्हें संत रामपाल जी महाराज द्वारा लिखित पुस्तक “भक्ति सौदागर को संदेश” पढ़ने को मिली, जिससे प्रभावित होकर उन्होंने यह मार्ग अपनाया।

प्रश्न 2: क्या भक्ति से बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं?

उत्तर: जी हाँ, गीता जी का अपना अनुभव, जहाँ उनके जेठ जी का तीसरी स्टेज का ब्रेन ट्यूमर ठीक हुआ, यह बताता है कि सच्ची भक्ति और पूर्ण गुरु की कृपा से असाध्य रोग भी ठीक हो सकते हैं।

प्रश्न 3: संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे लें?

उत्तर: आप विभिन्न टीवी चैनलों पर उनका सत्संग देख सकते हैं। सत्संग के दौरान स्क्रीन पर एक पीली पट्टी चलती है, जिस पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करके आप निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

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