सिकल सेल एनीमिया हुई नेगेटिव, डॉक्टरों ने कहा था ‘यह कभी ठीक नहीं होगी’: फिर हुआ चमत्कार

सिकल सेल एनीमिया हुई नेगेटिव, डॉक्टरों ने कहा था ‘यह कभी ठीक नहीं होगी’: फिर हुआ चमत्कार

मेडिकल साइंस में कुछ बीमारियों को ‘लाइलाज’ और ‘अनुवांशिक’ माना जाता है, यानी वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती हैं और उनका कोई स्थायी इलाज नहीं होता। ऐसी ही एक बीमारी है सिकल सेल एनीमिया। लेकिन क्या हो जब कोई कहे कि भक्ति की शक्ति से यह लाइलाज बीमारी भी जड़ से खत्म हो गई?

यह अविश्वसनीय लेकिन सच्ची कहानी है छत्तीसगढ़ के एक ग्रेजुएट युवक, श्री प्रशांत कुमार साहू जी की, जिन्होंने न केवल इस बीमारी को मात दी, बल्कि उनके पास इसे साबित करने के लिए मेडिकल रिपोर्ट्स भी हैं।

आप प्रशांत जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।

एक जीवन जो बीमारियों से घिरा था

संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले प्रशांत जी का जीवन कष्टों से भरा था।

  • एलर्जी और सूजन: 2008 से उन्हें गंभीर एलर्जी थी, जिससे उनका शरीर चार गुना तक सूज जाता था और वह चल-फिर भी नहीं पाते थे।
  • भूत-प्रेत बाधा: उन्हें भूत-प्रेत बाधाओं का भी सामना करना पड़ता था।
  • कार्डियक अरेस्ट के लक्षण: 2018 में उन्हें हार्ट की गंभीर समस्या होने लगी, जिससे वह 18 दिन और रात तक सो नहीं पाए थे।
  • लाइलाज सिकल सेल एनीमिया: सबसे बड़ी समस्या तब सामने आई जब जाँच में उन्हें 8% पॉजिटिव सिकल सेल एनीमिया निकला। डॉक्टरों ने साफ़ कह दिया कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है जो कभी ठीक नहीं होगी और उन्हें जीवन भर दवाइयाँ खानी पड़ेंगी।

प्रशांत जी बताते हैं कि डॉक्टरों ने यहाँ तक कह दिया था, “आप ज़्यादा दिन के मेहमान नहीं हो।”

ज्ञान गंगा से मिली जीवन की नई किरण

निराशा के इन क्षणों में, उनके बड़े पिताजी, जो पहले से ही संत रामपाल जी महाराज के अनुयायी थे, ने उन्हें “ज्ञान गंगा” पुस्तक दी। उस पुस्तक से ज्ञान समझकर और यह जानकर कि संत रामपाल जी जन्म-मरण तक का रोग काट सकते हैं, प्रशांत जी ने 17 अक्टूबर 2017 को नाम दीक्षा ली।

मेडिकल साइंस को हैरान करने वाले चमत्कार

नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में भक्ति करने के बाद प्रशांत जी के जीवन में जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था।

1. सिकल सेल पॉजिटिव से हुई नेगेटिव!

सबसे बड़ा चमत्कार उनकी अनुवांशिक बीमारी के साथ हुआ।

  • पहले की रिपोर्ट: नाम दीक्षा से पहले उनकी रिपोर्ट में 8% पॉजिटिव सिकल सेल था।
  • बाद की रिपोर्ट: संत रामपाल जी से जुड़ने के बाद जब उन्होंने दोबारा टेस्ट कराया, तो रिपोर्ट नेगेटिव आई।
  • डॉक्टर भी हैरान: प्रशांत जी बताते हैं कि आज भी जब पैथोलॉजी लैब वाले और डॉक्टर उनकी पुरानी और नई रिपोर्ट देखते हैं, तो वे हैरान हो जाते हैं कि जो बीमारी कभी ठीक नहीं हो सकती, वह नेगेटिव कैसे हो गई!

आज उनका हीमोग्लोबिन 14 ग्राम है, जो सिकल सेल के मरीजों में आमतौर पर नहीं बनता।

2. अन्य बीमारियों से भी मिली मुक्ति

  • उनकी एलर्जी, सूजन और भूत-प्रेत की बाधा जड़ से खत्म हो गई।
  • कार्डियक अरेस्ट के लक्षण केवल आश्रम में प्रार्थना लगवाने मात्र से ठीक हो गए।
  • जिन सब्ज़ियों (पालक, लाल भाजी) को खाने के लिए उन्हें मना किया गया था, आज वह सब कुछ खाते हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं।

एक ग्रेजुएट का समाज को संदेश

प्रशांत जी कहते हैं, “जिस प्रकार दो और दो चार होते हैं, पाँच नहीं, उसी प्रकार संत रामपाल जी महाराज की भक्ति विधि शास्त्रों के अनुसार सटीक है। अगर आप सही राह पर चलेंगे और मर्यादा में रहकर भक्ति करेंगे, तो यह बीमारियाँ तो बहुत छोटी चीज़ हैं, जन्म-मरण का रोग भी कट जाता है।”

और सच्ची कहानियाँ पढ़ें

प्रशांत जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।

FAQ

प्रश्न 1: सिकल सेल एनीमिया क्या है और इसका ठीक होना चमत्कार क्यों है?

सिकल सेल एनीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं अपना आकार बदल लेती हैं। मेडिकल साइंस के अनुसार यह एक लाइलाज बीमारी है, इसलिए इसका जड़ से खत्म होकर नेगेटिव हो जाना एक बहुत बड़ा चमत्कार है।

प्रश्न 2: प्रशांत जी की अनुवांशिक बीमारी कैसे ठीक हुई?

उत्तर: प्रशांत जी के अनुसार, यह संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई शास्त्र-अनुकूल भक्ति विधि और मर्यादा में रहने से ही संभव हुआ। पूर्ण परमात्मा किसी भी कर्म के लेख को बदल सकते हैं।

प्रश्न 3: कोई व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकता है?

आप विभिन्न टीवी चैनलों पर उनका सत्संग देख सकते हैं। सत्संग के दौरान स्क्रीन पर एक पीली पट्टी चलती है, जिस पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करके आप अपने नज़दीकी नामदान केंद्र का पता लगाकर निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

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