एक पढ़ी-लिखी सरकारी जूनियर इंजीनियर, जिसके जीवन में शादी के एक साल के अंदर ही दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि उसने जीने की उम्मीद ही छोड़ दी। पहले नवजात बच्चे की मृत्यु, फिर पति का देहांत और खुद बचपन से एक लाइलाज अनुवांशिक बीमारी से पीड़ित।
यह दिल को झकझोर देने वाली सच्ची कहानी है ओडिशा के संबलपुर जिले की श्रीमती हिमांगिनी बुई जी की, जिन्होंने हर तरफ से निराश होने के बाद सत्य की खोज की और उन्हें एक ऐसा रास्ता मिला जिसने उनकी पूरी ज़िंदगी बदल दी।
आप हिमांगिनी जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।
एक साल जिसमें सब कुछ बिखर गया
2010 में हिमांगिनी जी की शादी हुई, लेकिन खुशियाँ ज़्यादा दिन नहीं टिक सकीं।
- संतान का वियोग: 2011 में उनके बच्चे का जन्म हुआ, लेकिन वह केवल एक-दो दिन ही ज़िंदा रहा।
- पति का देहांत: बच्चे की मृत्यु के कुछ ही समय बाद, शादी के एक साल के अंदर ही उनके पति का भी देहांत हो गया।
- अधूरी आध्यात्मिक खोज: इन दुखों से उबरने और मोक्ष की तलाश में उन्होंने 6 महीने तक ब्रह्माकुमारी पंथ को भी अपनाया, लेकिन जब उन्हें पता चला कि वहाँ जन्म-मृत्यु से छुटकारे का कोई मार्ग नहीं है, तो वह और भी निराश हो गईं।
वह बताती हैं, “मैं बहुत दुखी हो गई थी, मेरी खोज थी कि जन्म-मृत्यु से छुटकारा कैसे मिले, सच्चे परमात्मा की भक्ति कैसे मिले।”
एक सत्संग जिसने शास्त्रों के रहस्य खोले
निराशा के इसी दौर में उन्होंने टीवी पर सच्चे गुरु की खोज शुरू की। उन्होंने रविशंकर समेत कई गुरुओं के सत्संग देखे, लेकिन उन्हें कहीं भी अपने सवालों का जवाब नहीं मिला।
फिर एक दिन उन्होंने संत रामपाल जी महाराज का सत्संग देखा। वह बताती हैं, “वह वेद और गीता उठाकर ज्ञान दिखा रहे थे। मेरे पापा को गिफ्ट में मिली गीता मैं उठाकर लाई और जो संत जी बता रहे थे, उसे टेली किया तो सब कुछ हूबहू वही मिला। तब मेरा विश्वास बढ़ा कि कबीर ही अल्लाह, परमात्मा, भगवान हैं और संत रामपाल जी महाराज शास्त्र अनुकूल साधना बता रहे हैं।”
इसके बाद उन्होंने टीवी पर दिए नंबर से संपर्क करके “भक्ति सौदागर को संदेश” पुस्तक मंगवाई और 2 जनवरी 2012 को बरवाला आश्रम जाकर नाम दीक्षा ग्रहण की।
भक्ति से मिला वो जीवन जो विज्ञान के लिए असंभव था
नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में भक्ति करने के बाद हिमांगिनी जी के जीवन में वो चमत्कार हुए, जिनकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।
1. लाइलाज सिकल सेल बीमारी हुई जड़ से खत्म
हिमांगिनी जी को बचपन से सिकल सेल (Sickle Cell Disease) की गंभीर बीमारी थी।
- डॉक्टरों का जवाब: उन्हें हर साल खून चढ़ाना पड़ता था और असहनीय दर्द होता था। डॉक्टरों ने साफ़ कह दिया था कि यह एक लाइलाज बीमारी है और उन्हें जीवन भर दवाइयाँ खानी पड़ेंगी और ज़रूरत पड़ने पर खून भी चढ़ेगा।
- भक्ति का चमत्कार: संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने के बाद उनकी यह बीमारी जड़ से खत्म हो गई। खून चढ़ना बंद हो गया, दर्द गायब हो गया और आज वह एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी रही हैं।
2. 25 दिन की गैर-हाजिरी के बाद भी बची रही नौकरी
2014 में बरवाला कांड के समय वह सत्संग सुनने गई थीं और लगभग 20-25 दिन तक अपनी नौकरी से अनुपस्थित रहीं। उन्हें डर था कि उनकी नौकरी चली जाएगी। लेकिन जब वह वापस आईं, तो किसी ने उनसे एक शब्द भी नहीं पूछा। वह इसे परमात्मा का बड़ा चमत्कार मानती हैं।
3. मिला प्रमोशन और मानसिक शांति
भक्ति मार्ग पर चलने के बाद 2017 में उन्हें नौकरी में प्रमोशन मिला और वह रेगुलर कर्मचारी बन गईं। वह कहती हैं, “संत रामपाल जी का ज्ञान मिलने के बाद मुझे पता चला कि जीने का मकसद क्या होना चाहिए। मुझे मानसिक शांति मिली।”
एक इंजीनियर का समाज को संदेश
हिमांगिनी जी सभी से अनुरोध करती हैं, “आप संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान सुनें, उसे अपने धर्मग्रंथों से मिलाएँ। संत रामपाल जी महाराज कोई मामूली इंसान नहीं, वह स्वयं पूर्ण परमात्मा हैं। जल्दी से जल्दी उनसे जुड़ें और अपना कल्याण कराएं।”
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हिमांगिनी जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।
FAQ
प्रश्न 1: हिमांगिनी बुई जी इतनी निराश क्यों थीं?
उत्तर: शादी के एक साल के भीतर ही उनके नवजात बच्चे और पति की मृत्यु हो गई थी। इसके साथ ही वह खुद बचपन से सिकल सेल नामक लाइलाज बीमारी से पीड़ित थीं, जिस कारण वह बहुत दुखी थीं।
प्रश्न 2: उनकी लाइलाज सिकल सेल बीमारी कैसे ठीक हुई?
उत्तर: हिमांगिनी जी के अनुसार, यह संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई शास्त्र-अनुकूल भक्ति विधि और नाम-मंत्र की शक्ति से ही संभव हुआ, जिसने इस अनुवांशिक बीमारी को भी जड़ से खत्म कर दिया।
प्रश्न 3: कोई व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकता है?
उत्तर: आप विभिन्न टीवी चैनलों पर उनका सत्संग देख सकते हैं या उनकी आधिकारिक वेबसाइट www.jagatgururampalji.org पर जाकर अपने नज़दीकी नामदान केंद्र का पता लगाकर निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

