बच्चेदानी में मांस की गांठ बनी कैंसर का खतरा

बच्चेदानी में मांस की गांठ बनी कैंसर का खतरा, बिना ऑपरेशन भक्ति से मिली नई ज़िंदगी

जब डॉक्टरों ने जाँच के बाद बताया कि “आपकी माँ की बच्चेदानी में 6mm मांस की गांठ है, ऑपरेशन करके बच्चेदानी निकालनी पड़ेगी, ₹40,000 लगेंगे और यह कैंसर भी हो सकता है,” तो एक बेटे के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। लेकिन उस परिवार ने ऑपरेशन की जगह प्रार्थना का रास्ता चुना और जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था।

यह अविश्वसनीय सच्ची कहानी है छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के निवासी, श्री लुकेश दास जी की, जिनका परिवार पहले से ही कबीर पंथी था, लेकिन उन्हें उस अधूरे ज्ञान से वो लाभ नहीं मिल रहे थे जिसकी उन्हें तलाश थी।

आप लुकेश जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।

कबीर पंथ से सत्य की खोज तक का सफर

लुकेश जी का परिवार छत्तीसगढ़ के सम्मानित संत, गुरु घासीदास जी का अनुयायी था और सतनामी पंथ से जुड़ा था। वह बताते हैं कि गुरु घासीदास जी की कई वाणियाँ संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से मिलती-जुलती थीं, जैसे “सतनाम सतनाम सब कहें, सतनाम जाने ना कोय।” लेकिन घासीदास जी के पंथ में वह पूर्ण ज्ञान और मोक्ष का स्पष्ट मार्ग नहीं मिल रहा था।

एक दिन उनके पिता टीवी पर चैनल बदल रहे थे कि अचानक साधना टीवी पर संत रामपाल जी महाराज का सत्संग लग गया। जब उन्होंने सत्संग सुना और अपने ज्ञान से मिलान किया, तो उन्हें समझ आया कि संत रामपाल जी महाराज वही पूर्ण सत्य और शास्त्र-आधारित साधना बता रहे हैं जिसकी उन्हें तलाश थी।

इस ज्ञान से प्रेरित होकर, लुकेश जी ने 1 मार्च 2014 को संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ग्रहण की।

भक्ति की शक्ति: जब टल गया ₹40,000 का ऑपरेशन

नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में भक्ति करने के बाद लुकेश जी और उनके परिवार को अनेक लाभ मिले, लेकिन सबसे बड़ा चमत्कार उनकी माँ के साथ हुआ।

माँ की जानलेवा बीमारी का अंत

2017 में उनकी माँ को कमर में असहनीय दर्द शुरू हुआ।

  • खतरनाक निदान: स्थानीय डॉक्टरों से आराम न मिलने पर जब उन्होंने बड़े अस्पताल में सोनोग्राफी करवाई, तो रिपोर्ट में पता चला कि उनकी बच्चेदानी में 6mm मांस की गांठ चिपक गई है।
  • डॉक्टरों की सलाह: डॉक्टरों ने तुरंत बच्चेदानी निकालने के ऑपरेशन की सलाह दी, जिसका खर्च ₹40,000 बताया और यह भी चेतावनी दी कि यह कैंसर हो सकता है।
  • प्रार्थना का चमत्कार: ऑपरेशन की तारीख लेने की बजाय, उनके पिता ने संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना लगाई। गुरुजी का आदेश आया, “बेटा, परमात्मा पर विश्वास रखो और भक्ति करते रहो।” उस एक भरोसे पर उन्होंने माँ को अस्पताल से डिस्चार्ज करा लिया और कोई ऑपरेशन नहीं करवाया। लुकेश जी बताते हैं कि 2017 से आज तक उनकी माँ को वह दर्द दोबारा कभी नहीं हुआ और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।

और भी मिले अनेक लाभ

  • पिता का बवासीर ठीक हुआ: उनके पिता को तीन साल से बवासीर (Piles) की बीमारी थी, जो नाम दीक्षा लेने के बाद बिना किसी दवा के जड़ से खत्म हो गई।
  • बचपन का निमोनिया खत्म: खुद लुकेश जी को बचपन से हर साल निमोनिया हो जाता था, जो नाम दीक्षा लेने के बाद पूरी तरह से ठीक हो गया।

लुकेश दास जी का समाज को संदेश

लुकेश जी कहते हैं, “मैं सभी को यही कहना चाहूंगा कि आप भी संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लें। उनकी भक्ति से आपको न केवल शारीरिक, बल्कि आध्यात्मिक और आर्थिक लाभ भी मिलेंगे और आप सतभक्ति करके अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।”

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लुकेश दास जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।

FAQ

प्रश्न 1: लुकेश जी की माँ की बीमारी क्या थी?

उत्तर: उनकी माँ की बच्चेदानी में 6mm की मांस की गांठ थी, जिसके लिए डॉक्टरों ने बच्चेदानी निकालने का ऑपरेशन बताया था और कैंसर होने का भी खतरा जताया था।

प्रश्न 2: क्या उनकी माँ का ऑपरेशन हुआ?

उत्तर: जी नहीं, उन्होंने ऑपरेशन नहीं करवाया। संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना लगाने और उनके बताए भक्ति मार्ग पर चलने से उनकी माँ बिना किसी मेडिकल इलाज के पूरी तरह स्वस्थ हो गईं।

प्रश्न 3: कोई व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकता है?

उत्तर: आप विभिन्न टीवी चैनलों पर उनका सत्संग देख सकते हैं। सत्संग के दौरान स्क्रीन पर एक पीली पट्टी चलती है, जिस पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करके आप अपने नज़दीकी नामदान केंद्र का पता लगाकर निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

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