इबादत के बाद भी था दुखों का अंबार, फिर संत रामपाल जी ने बदली मध्य प्रदेश की सोमन खान की तकदीर

इबादत के बाद भी था दुखों का अंबार, फिर संत रामपाल जी ने बदली मध्य प्रदेश की सोमन खान की तकदीर

अक्सर हम ईश्वर या अल्लाह की तलाश में दर-दर भटकते हैं, लेकिन क्या वाकई हमें वह ‘बाखबर’ मिल पाता है जो हमारे दुखों को जड़ से खत्म कर सके? आज हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के मुरैना जिले की रहने वाली सोमन खान जी की, जिनका जीवन एक समय दुखों और परेशानियों से घिर चुका था, लेकिन एक चमत्कार ने उनकी पूरी दुनिया बदल दी।

जब नमाज और दरगाहों की खाक छानने के बाद भी नहीं मिला सुकून

सोमन खान जी बताती हैं कि वह एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। वह बचपन से ही कुरान शरीफ पढ़ती थीं, उर्दू की तालीम ली, पांच वक्त की नमाज पढ़ी और हर साल रोजे भी रखे। इतना ही नहीं, अपनी परेशानियों के हल के लिए वह अजमेर शरीफ और कलियर शरीफ जैसी बड़ी दरगाहों पर भी गईं।

इतनी इबादत के बाद भी उनकी जिंदगी में अंधेरा छाया हुआ था। उनकी एक छोटी बेटी खत्म हो गई, डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे। घर में भूत-प्रेत की बाधाएं थीं और उनके पति पर झूठे आरोप लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया था। सोमन जी कहती हैं, “इतनी इबादत करने के बाद भी हम बहुत दुखी थे, कहीं कोई लाभ नहीं मिल रहा था।”

एक दुआ और रातों-रात हुआ चमत्कार (जीवन का बदलाव)

जब चारों तरफ अंधेरा था, तब उन्हें संत रामपाल जी महाराज के बारे में पता चला। सोमन जी ने मन में ही एक अर्जी लगाई— “अगर संत रामपाल महाराज जी सच्चे गुरु हैं, तो आज रात मेरे पति जेल से बाहर आ जाएं।” आश्चर्य की बात यह थी कि उसी रात उनके पति जेल से रिहा हो गए। इस चमत्कार ने सोमन खान के विश्वास को पक्का कर दिया और उन्होंने 2017 में संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ले ली।

सोमन जी ने अपने पति को भी समझाया कि कुरान शरीफ में जिसे ‘कबीरन’ या ‘अल्लाहु अकबर’ कहा गया है, वह कबीर परमात्मा ही हैं। इसके बाद उनके पति ने भी नाम दीक्षा ली और ज्ञान को समझा।

क्या मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू बनना पड़ा?

अक्सर लोग सोचते हैं कि संत रामपाल जी से जुड़ने का मतलब धर्म बदलना है, लेकिन सोमन खान ने इसका बहुत स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने बताया:

“मैं संत रामपाल महाराज की शरण में आई तो मैं हिंदू नहीं हुई हूँ। मुझे तो एक सच्चे अल्लाह की तलाश थी और संत जी वही ज्ञान बता रहे हैं जो हमारी पाक कुरान शरीफ में लिखा है। मैं उसी पर चल रही हूँ और मुझे बहुत लाभ मिल रहे हैं।”

भक्ति से मिले चमत्कारी लाभ

नाम दीक्षा लेने के बाद सोमन जी के जीवन में खुशियों की लहर दौड़ गई:

  • संतान सुख: जो डॉक्टर मना कर चुके थे, संत जी से जुड़ने के बाद उन्हें एक सुंदर बेटा हुआ।
  • बुरी शक्तियों से मुक्ति: घर में जो भूत-प्रेत की पुरानी परेशानी थी, वह पूरी तरह खत्म हो गई।
  • पारिवारिक शांति: पति-पत्नी के बीच होने वाले रोज के झगड़े बंद हो गए और घर में सुख-शांति आ गई।
  • रोजगार में बरकत: उनके पति जिनका काम में मन नहीं लगता था, अब वह अच्छे से काम कर रहे हैं और घर की आर्थिक स्थिति सुधर गई है।

मुस्लिम समाज के लिए संदेश

सोमन खान जी आज गर्व से कहती हैं कि सिर्फ रस्मी इबादत करने से लाभ नहीं मिलता। वह कहती हैं, “मैं मुस्लिम समाज से कहना चाहूंगी कि कहीं भी सिर्फ नमाज या रोजे रखने से लाभ नहीं है जब तक आपको सही ज्ञान न मिले। संत रामपाल जी महाराज की शरण में आएं, क्योंकि वह वही इबादत बताते हैं जो हमारी कुरान शरीफ में लिखी है। अपना कल्याण कराएं।”

आप कैसे ले सकते हैं नाम दीक्षा?

अगर आप भी अपनी समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं और सच्चा आध्यात्मिक मार्ग खोजना चाहते हैं, तो आप संत रामपाल जी महाराज के सत्संग टीवी चैनलों पर देख सकते हैं। सत्संग के दौरान नीचे चल रही पीली पट्टी पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करके आप अपने नजदीकी नाम दान केंद्र की जानकारी ले सकते हैं और नाम दीक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

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सोमन खान जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। उनके जीवन के दुख न केवल खत्म हुए, बल्कि उन्हें एक नई और सुखद जिंदगी मिली है।

ऐसी ही और भी अविश्वसनीय, सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ। यहाँ आपको हर राज्य और हर वर्ग के लोगों के वास्तविक अनुभव मिलेंगे जो आपकी आस्था को और मजबूत करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. क्या मुस्लिम नाम दीक्षा ले सकते हैं?

हाँ, सोमन खान की तरह कोई भी मुस्लिम नाम दीक्षा ले सकता है, क्योंकि संत रामपाल जी कुरान शरीफ के अनुसार ही सच्ची इबादत बताते हैं।

2. क्या इससे धर्म बदल जाता है?

नहीं, संत जी धर्म नहीं बदलते। वे सभी पवित्र ग्रंथों से प्रमाणित एक अल्लाह की भक्ति बताते हैं, जिससे सोमन खान को चमत्कारी लाभ मिले।

3. नाम दीक्षा कैसे मिलती है?

सत्संग के दौरान टीवी पर दिए गए नंबरों पर कॉल करके या नजदीकी नाम दान केंद्र पर जाकर आप निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

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