“या तो माँ बचेगी या बच्चा।” यह वो शब्द थे जो एक सरकारी अधिकारी ने अपनी डिलीवरी के समय डॉक्टरों से सुने। बच्चे का सिर उल्टा घूम चुका था और स्थिति बेहद नाजुक थी। लेकिन जब विज्ञान की सीमाएं खत्म होती हैं, तब विश्वास एक नया रास्ता दिखाता है।
यह रोंगटे खड़े कर देने वाली सच्ची कहानी है ओडिशा के झांसुगुड़ा जिले की निवासी, श्रीमती रंजुकता मेहर जी की, जो ओडिशा सरकार में सब-डिविजनल सोशल सिक्योरिटी ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। माता-पिता को खोने के बाद, उन्होंने एक ऐसी भक्ति को अपनाया जिसने न केवल उन्हें जीवन का उद्देश्य दिया, बल्कि मौत के मुँह से भी वापस ले आया।
आप रंजुकता जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।
माता-पिता को खोने के बाद सत्य की खोज
रंजुकता जी बचपन से ही बहुत धार्मिक थीं, लेकिन जब बीमारी के कारण उनके माता-पिता का देहांत हो गया, तो उनका विश्वास डगमगा गया। उन्हें लगा कि उनकी पूजा-पाठ व्यर्थ है। इसी निराशा में उन्होंने सत्य की खोज शुरू की।
उनकी एक ऑफिस सहकर्मी ने उन्हें संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान से परिचित कराया और “सृष्टि रचना” नामक किताब दी। रंजुकता जी बताती हैं, “मैंने उस किताब को पढ़ा और मुझे पता चला कि हाँ, यही सही विधि और सही साधना है। यहाँ मुझे सही रास्ता मिलेगा।”
ज्ञान को पूरी तरह समझने और शास्त्रों से मिलान करने के बाद, उन्होंने 25 जनवरी 2013 को संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ग्रहण की।
भक्ति से मिले चमत्कार: जब विज्ञान ने भी मान ली हार
नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में भक्ति करने के बाद रंजुकता जी के जीवन में कई चमत्कार हुए, लेकिन सबसे बड़ा चमत्कार उनके बच्चे के जन्म के समय हुआ।
वो चमत्कार जिसने माँ और बच्चे दोनों को बचाया
- डॉक्टरों ने दिया जवाब: डिलीवरी के समय बच्चे का सिर उल्टा घूम गया था, जिसे एक बेहद खतरनाक स्थिति माना जाता है। डॉक्टरों ने साफ़ कह दिया था कि “या तो माँ बचेगी या बच्चा।”
- प्रार्थना में शक्ति: उस संकट की घड़ी में उन्होंने संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना की। गुरुजी का आशीर्वाद मिला कि “ऑपरेशन करवाओ, कुछ नहीं होगा।”
- ऑपरेशन टेबल पर चमत्कार: रंजुकता जी का दावा है कि जब वह ऑपरेशन टेबल पर थीं, तो संत रामपाल जी महाराज स्वयं वहाँ प्रकट हुए और उनकी और उनके बच्चे, दोनों की जान बचाई। डॉक्टरों के अनुमान के विपरीत, ऑपरेशन सफल रहा और माँ-बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ थे।
नौकरी में आश्चर्यजनक प्रमोशन और आर्थिक उन्नति
- वह ओडिशा सरकार में एक छोटे पद पर कार्यरत थीं, लेकिन भक्ति मार्ग पर चलने के 11 साल के अंदर उन्हें सब-डिविजनल सोशल सिक्योरिटी ऑफिसर के पद पर प्रमोशन मिला, जो सरकारी नौकरियों में एक आश्चर्यजनक बात है।
- वह बताती हैं कि जो पहले किराए के घर में रहती थीं, आज संत रामपाल जी की दया से उनका अपना घर और प्लॉट है।
शारीरिक कष्टों का अंत
नाम दीक्षा से पहले वह हमेशा बीमार रहती थीं और सर दर्द से परेशान थीं। उनके भाई-बहन भी उनकी बीमारी से तंग आ चुके थे। लेकिन नाम दीक्षा के बाद उनकी सारी बीमारियाँ बिना किसी दवा के जड़ से खत्म हो गईं।
एक अधिकारी का समाज के लिए संदेश
रंजुकता जी, विशेष रूप से ओडिशा के लोगों से अपील करती हैं, “मैं एक पढ़ी-लिखी लड़की हूँ और मैं किसी अंधविश्वास से नहीं जुड़ी हूँ। मैंने खुद गीता खोलकर गुरुजी के ज्ञान का मिलान किया है। आप भी एक बार सत्संग सुनें, किताब पढ़ें और फिर फैसला करें। संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण परमात्मा हैं।”
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रंजुकता जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।
FAQ
प्रश्न 1: रंजुकता मेहर जी के जीवन में सबसे बड़ा संकट क्या था?
उत्तर: उनके बच्चे के जन्म के समय, डॉक्टरों ने कह दिया था कि स्थिति इतनी गंभीर है कि या तो माँ बच पाएगी या बच्चा। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा संकट था।
प्रश्न 2: उस संकट का समाधान कैसे हुआ?
उत्तर: रंजुकता जी के अनुसार, यह संत रामपाल जी महाराज से की गई प्रार्थना और उनके आशीर्वाद से ही संभव हुआ। उनका दावा है कि गुरुजी ने स्वयं ऑपरेशन टेबल पर प्रकट होकर उनकी और उनके बच्चे की जान बचाई।
प्रश्न 3: क्या संत रामपाल जी महाराज देवी-देवताओं की पूजा छुड़वाते हैं?
उत्तर: रंजुकता जी स्पष्ट करती हैं कि यह एक गलत धारणा है। वह कहती हैं कि गुरुजी उन देवी-देवताओं के सही “कोड वर्ड” मंत्र बताते हैं, जिससे उनकी भक्ति और भी प्रभावशाली हो जाती है।

