जौनपुर के राम जी मौर की आपबीती

मौत के मुँह से वापसी: जौनपुर के राम जी मौर की लकवा और जानलेवा दुर्घटना से बचने की सच्ची कहानी

राम जी मौर की आपबीती: यह कहानी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक छोटे से गाँव रानीपुर के रहने वाले राम जी मौर की है। एक समय था जब राम जी मौर अपने जीवन के दुखों और परेशानियों से इतने तंग आ चुके थे कि उनका भगवान और आध्यात्मिकता से विश्वास ही उठ गया था। लेकिन फिर उनके जीवन में एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने न केवल उन्हें नई जिंदगी दी, बल्कि मौत के सामने से भी सुरक्षित वापस ले आया।

दुखों का दौर और नास्तिकता की ओर झुकाव

राम जी मौर बताते हैं कि वे अपने पारिवारिक विवादों, जमीन के झगड़ों और शारीरिक कष्टों के कारण बहुत परेशान थे। उन्होंने शांति और समाधान के लिए कई ज्योतिषियों, संतों और आध्यात्मिक गुरुओं के चक्कर लगाए। उन्होंने सत्य साईं बाबा और कई शंकराचार्य के बताए मार्गों का अनुसरण किया, लेकिन कहीं भी उनके दुखों का निवारण नहीं हुआ। हार मानकर वे नास्तिक हो गए और काफी समय तक बौद्ध धर्म से भी जुड़े रहे।

बंबई की यात्रा और वह जादुई पुस्तक

परेशानियों से तंग आकर वे खुद को सेट करने के लिए बंबई चले गए। वहाँ अपने एक रिश्तेदार के यहाँ उन्होंने एक पुस्तक देखी जिसका नाम था “भक्ति सौदागर का संदेश”। उस पुस्तक को पढ़ते ही उनके अंदर एक जिज्ञासा पैदा हुई। उसमें लिखा था कि कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं। यह बात उनके लिए बिल्कुल नई थी क्योंकि स्कूल की पढ़ाई में उन्होंने कबीर दास जी को केवल एक कवि के रूप में पढ़ा था।

मदन पंथ का अनुभव और सत्य की खोज

घर लौटने के बाद वे जौनपुर के प्रसिद्ध मदन पंथ से जुड़े। वे लगातार पाँच सालों तक उनके सत्संगों में जाते रहे और वहां के साधु-संतों से पूछते रहे कि क्या कबीर साहब ही परमात्मा हैं? लेकिन वहां के गुरु उन्हें कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सके। राम जी मौर अंदर ही अंदर तड़प रहे थे और परमात्मा से गुहार लगा रहे थे कि “हे मालिक, अगर आप धरती पर कहीं हैं तो मुझे रास्ता दिखाएं।”

लकवा का हमला और ईश्वरीय संकेत

साल दो हजार चौदह में अचानक राम जी मौर को लकवा (फालिश) मार गया। उनका ब्लड प्रेशर बुरी तरह अनियंत्रित रहने लगा और शरीर का आधा हिस्सा सुन्न हो गया। दवाइयों से कोई आराम नहीं मिल रहा था। तभी एक सुबह भोर के समय उन्हें एक अद्भुत प्रकाश पुंज दिखाई दिया और एक आवाज आई— “तुरंत जाकर संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ले ले, बरवाला, हिसार पहुंच।”

संत रामपाल जी महाराज की शरण और चमत्कारी लाभ

बिना देर किए उन्होंने बरवाला आश्रम जाने का फैसला किया और एक मई दो हजार चौदह को अपने परिवार के साथ संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ली। इसके बाद उनके जीवन में चमत्कारों की झड़ी लग गई:

  1. लकवा ठीक होना: बिना किसी भारी दवा के उनका लकवा पूरी तरह ठीक हो गया और शरीर पहले जैसा स्वस्थ हो गया।
  2. पुराना दर्द गायब: बचपन में सिर पर लगी एक गहरी चोट, जिसका दर्द कई दिनों तक बना रहता था, वह हमेशा के लिए खत्म हो गया।
  3. ब्लड प्रेशर नियंत्रण: उनकी बीपी की समस्या जड़ से खत्म हो गई।

जब ट्रक के नीचे आने से बचा लिया परमात्मा ने

एक बार राम जी मौर अपनी बाइक से जा रहे थे। हेलमेट ठीक करते समय उनका ध्यान भटका और सामने से एक तेज रफ्तार ट्रक आ गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि उनकी बाइक की डिग्गी के परखच्चे उड़ गए, लेकिन चमत्कार यह था कि राम जी मौर को एक खरोंच तक नहीं आई। ट्रक की टक्कर के बावजूद उनकी बाइक हिली तक नहीं और वे सुरक्षित एक तरफ खड़े रहे।

समाज के लिए संदेश

राम जी मौर विशेष रूप से मदन पंथ के अनुयायियों से अपील करते हैं कि वे केवल साखियों पर न जाएं, बल्कि कबीर सागर और अन्य सद्ग्रंथों को गहराई से पढ़ें। वे कहते हैं कि आज संत रामपाल जी महाराज ही वह एकमात्र संत हैं जो सभी ग्रंथों से प्रमाणित ज्ञान दे रहे हैं।

अगर आप भी अपने जीवन के दुखों से छुटकारा पाना चाहते हैं और उस पूर्ण परमात्मा की पहचान करना चाहते हैं, तो आज ही संत रामपाल जी महाराज के सत्संग सुनें और उनकी शरण ग्रहण करें।

और सच्ची कहानियाँ पढ़ें

राम जी मौर जी की तरह ही, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की सतभक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व और चमत्कारी बदलाव महसूस किए हैं। उनकी फालिश (लकवा) की बीमारी और मौत के मुँह से बचने की घटना यह प्रमाणित करती है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हर असंभव कार्य संभव हो सकता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. राम जी मौर को कौन सी गंभीर बीमारियाँ थीं?

राम जी मौर को लकवा (फालिश), अनियंत्रित ब्लड प्रेशर और बचपन की चोट के कारण सिर में असहनीय दर्द की समस्या थी।

2. संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने के बाद उन्हें क्या शारीरिक लाभ हुए?

नाम दीक्षा लेने के बाद उनका लकवा बिना किसी विशेष दवा के पूरी तरह ठीक हो गया, ब्लड प्रेशर सामान्य रहने लगा और सिर का पुराना दर्द हमेशा के लिए खत्म हो गया।

3. ट्रक दुर्घटना के दौरान उनके साथ क्या चमत्कार हुआ?

एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मारी जिससे बाइक की डिग्गी पूरी तरह चकनाचूर हो गई, लेकिन परमात्मा की कृपा से उनकी बाइक हिली तक नहीं और उन्हें एक खरोंच भी नहीं आई।

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