उत्तराखंड की सरकारी टीचर तारा जोशी, अपनी माँ के कैंसर ठीक होने का अनुभव बताते हुए।

जब डॉक्टरों ने दिए 2 साल, भक्ति ने दिए 10 साल: एक पुजारी परिवार की सच्ची कहानी

अगर हमारा इलाज सफल रहा, तो आपकी माँ की उम्र दो-ढाई साल और बढ़ सकती है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है।” यह वो शब्द थे जो दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक बेटी से कहे, जब उसकी माँ कैंसर की तीसरी स्टेज में पहुँच चुकी थी। लेकिन जहाँ विज्ञान ने एक सीमा खींच दी थी, वहाँ विश्वास ने एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया जो आज 10 साल बाद भी एक जीती-जागती मिसाल है।

यह अविश्वसनीय सच्ची कहानी है उत्तराखंड की श्रीमती तारा जोशी जी की, जो एक सरकारी इंटर कॉलेज में टीचर हैं और जिनका जन्म प्रसिद्ध शिवधाम जागेश्वर के एक पुजारी परिवार में हुआ था।

आप तारा जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।

एक पुजारी परिवार जिसे थी सच्चे गुरु की तलाश

तारा जी का परिवार पीढ़ियों से जागेश्वर धाम में पुजारी का कार्य करता था। वह स्वयं शिवजी को अपना इष्ट मानती थीं और गीता, रामचरितमानस का नियमित पाठ करती थीं। ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के कारण उन्होंने कभी गुरु बनाने के बारे में सोचा भी नहीं था।

लेकिन 2010 में उनके पति ने टीवी पर संत रामपाल जी महाराज का सत्संग सुना। जब उन्होंने शास्त्रों से प्रमाणित ज्ञान सुना कि पूर्ण मोक्ष ब्रह्मा, विष्णु, महेश से भी ऊपर पूर्ण ब्रह्म की साधना से ही संभव है, तो उनकी आँखें खुल गईं। तारा जी बताती हैं, “मैंने भी सोचा अगर मोक्ष का मतलब पूर्ण मोक्ष ही होना चाहिए, तो मुझे भी सुनना चाहिए कि संत रामपाल जी क्या कह रहे हैं।”

सत्संग सुनने और “ज्ञान गंगा” पुस्तक पढ़ने के बाद उन्हें पूर्ण विश्वास हो गया और अक्टूबर 2013 में उन्होंने संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ग्रहण की।

भक्ति का चमत्कार: जब माँ को कैंसर से मिला जीवनदान

नाम दीक्षा लेने के बाद तारा जी को अनेक लाभ हुए, लेकिन सबसे बड़ा चमत्कार उनकी माँ के साथ हुआ, जिसने मेडिकल साइंस को भी हैरान कर दिया।

माँ को था थर्ड स्टेज कैंसर

  • डॉक्टरों का जवाब: उनकी माँ को कैंसर था जो तीसरी स्टेज में पहुँच चुका था। दिल्ली के बत्रा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के बाद कहा कि अगर इलाज सफल भी हुआ तो वह केवल 2-2.5 साल ही और जी पाएंगी।
  • हर तरफ से निराशा: परिवार ने अपनी माँ को बचाने के लिए स्थानीय देवता के मंदिर में बकरों की बलि तक दी, लेकिन उनकी पीड़ा कम नहीं हुई।
  • “अमृत जल” का चमत्कार: तारा जी जब नाम दीक्षा लेने गईं, तो उन्होंने अपनी माँ की पीड़ा गुरुजी को बताई। संत रामपाल जी महाराज ने उन्हें एक शीशी में “अमृत जल” दिया और कहा, “अपनी मम्मी को दे देना, वह ठीक हो जाएगी।”
  • चमत्कार की शुरुआत: तारा जी बताती हैं कि अमृत जल पीने के पहले ही दिन से उनकी माँ को दर्द में आराम मिलने लगा और उन्होंने दर्द की दवाइयां खानी बंद कर दीं।
  • 10 साल बाद भी स्वस्थ: एक महीने के भीतर उनकी माँ इतनी स्वस्थ हो गईं कि वह खुद आश्रम जाकर नाम दीक्षा ले सकीं। तारा जी कहती हैं, “डॉक्टरों ने दो-ढाई साल कहा था, लेकिन आज उन बातों को दस वर्ष पूरे हो गए हैं और मेरी माँ पूरी तरह स्वस्थ हैं।”

पति की बुरी आदतें छूटीं और घर में आई बरकत

  • बुरी आदतों से छुटकारा: उनके पति को महंगी शराब पीने, मांस खाने और जुआ खेलने का शौक था। सत्संग सुनने मात्र से उन्होंने मांस खाना छोड़ दिया और नाम दीक्षा लेने के बाद शराब को हाथ तक नहीं लगाया।
  • आर्थिक समृद्धि: पति की बुरी आदतें छूटने के बाद उनके घर में बरकत आने लगी। वही नौकरी करते हुए उन्होंने कई ज़मीनें खरीदीं, मकान बनाया और आज उनके पास अच्छी बचत है।

एक टीचर का समाज को संदेश

तारा जोशी जी, जो खुद एक शिक्षित टीचर हैं, कहती हैं, “उत्तराखंड में हर किलोमीटर पर मंदिर-धाम हैं, हम हर जगह गए पर कोई लाभ नहीं हुआ। लाभ इसलिए नहीं हुआ क्योंकि वह शास्त्र-अनुकूल साधना नहीं थी। संत रामपाल जी महाराज शास्त्र सम्मत साधना बताते हैं और इसीलिए उनकी भक्ति से लाभ मिलते हैं। आज शिक्षित समाज है, जब लोग खुद शास्त्र खोलकर देखेंगे तो उन्हें सत्य पता चल जाएगा।”

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तारा जोशी जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।

FAQ

प्रश्न 1: तारा जोशी की माँ को कौन सी बीमारी थी?

उत्तर: उनकी माँ को कैंसर था जो तीसरी स्टेज में पहुँच चुका था और डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन की स्टेज से भी बाहर हो चुका था।

प्रश्न 2: उनकी माँ का कैंसर कैसे ठीक हुआ?

उत्तर: तारा जी के अनुसार, उनकी माँ का कैंसर संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिए गए “अमृत जल” और नाम दीक्षा लेकर भक्ति करने से बिना किसी दवा या ऑपरेशन के ठीक हुआ।

प्रश्न 3: एक पुजारी परिवार की बेटी होने के बावजूद उन्होंने गुरु क्यों बनाया?

उत्तर: क्योंकि उन्हें अपने पारंपरिक पूजा-पाठ से जीवन के दुखों का कोई समाधान नहीं मिल रहा था। जब उन्होंने संत रामपाल जी महाराज का शास्त्र-आधारित ज्ञान सुना, तब उन्हें पूर्ण मोक्ष के सही मार्ग का पता चला।

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