जब एक स्कूल की रिटायर्ड प्रिंसिपल, जो जीवन भर बच्चों को ज्ञान बांटती रही, यह कहे कि असली ज्ञान उसे किताबों से नहीं बल्कि एक सच्चे गुरु की शरण में मिला, तो यह हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देता है।
यह कहानी है नागपुर, महाराष्ट्र की श्रीमती विजय घनश्याम उमाले जी की, जो न केवल उच्च शिक्षित हैं बल्कि जीवन भर अध्यात्म की खोज में भी रहीं। उनकी यह खोज उन्हें आसाराम बापू और कुमार स्वामी जैसे गुरुओं से लेकर अंत में संत रामपाल जी महाराज की शरण तक ले आई, जहाँ उन्हें न केवल ज्ञान मिला बल्कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी पर भी विजय मिली।
आप विजय जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।
ज्ञान की तलाश और अधूरे गुरुओं का अनुभव
विजय जी को बचपन से ही अध्यात्म में रुचि थी, लेकिन गीता जैसे ग्रंथ भी उन्हें बिना गुरु के कभी पूरी तरह समझ नहीं आए। अपनी इसी खोज में वह कई प्रसिद्ध गुरुओं से जुड़ीं।
वह बताती हैं, “मैं आसाराम बापू के सत्संग में जाया करती थी और कुमार स्वामी से भी दीक्षा ली थी। लेकिन मुझे वहाँ ऐसा लगा कि पैसे से ही ज़्यादा प्यार है। मेरा मन आकृष्ट हो जाए, ऐसा मुझे कुछ भी नहीं मिला।” एक पढ़ी-लिखी महिला होने के नाते, वह ज्ञान को परखती थीं और जब उन्हें संतुष्टि नहीं मिली, तो उनकी तलाश जारी रही।
एक किताब जिसने जीवन की दिशा बदल दी
उनके जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया जब उनके पति वाराणसी से “ज्ञान गंगा” नामक एक पुस्तक लेकर आए। विजय जी बताती हैं, “पढ़ने के बाद मैं इतनी आकृष्ट हो गई कि मैंने इन्हें कहा चलो हम बरवाला आश्रम जाएंगे।”
2012 में जब वह संत रामपाल जी महाराज के आश्रम पहुँचीं, तो उनके अनुभव अद्भुत थे। वह कहती हैं, “जैसे मैं पहुंची, मेरी आँखों में बहुत आँसू आने लगे। मुझे लगा कि सच्चा ज्ञान और सच्चा गुरु मुझे यहीं मिलेगा और मैंने तुरंत नाम दीक्षा ले ली।”
भक्ति की शक्ति: जब 100% कैंसर भी हार गया
नाम दीक्षा लेने के कुछ साल बाद, 2015 में विजय जी के पेट में दर्द शुरू हुआ। जाँच में जो सामने आया, वह चौंकाने वाला था।
- 100% कैंसर की पुष्टि: नागपुर के Zenith Hospital में ऑपरेशन हुआ और सैंपल मुंबई के Tata Institute में भेजे गए। रिपोर्ट में 100% कैंसर की पुष्टि हुई।
- डॉक्टर भी हैरान: ऑपरेशन के बाद डॉक्टर भी हैरान थे कि इतनी ज़्यादा उम्र होने के बावजूद विजय जी सबसे अच्छा रिस्पॉन्स दे रही थीं।
- बिना दवा, बिना वापसी के कैंसर पर विजय: विजय जी पूरे आत्मविश्वास से कहती हैं, “मेरा कैंसर ठीक हो गया। साढ़े छह साल हो गए, वह दोबारा नहीं आया, नहीं तो ऑपरेशन के बाद यह और ज़ोर से बढ़ता है। मुझे दोबारा दवाखाने नहीं जाना पड़ा क्योंकि मुझे मेरे गुरु पर 101% विश्वास है।”
इसके अलावा उनके पैरों का पुराना दर्द भी बिना किसी दवा के ठीक हो गया।
एक प्रिंसिपल का पढ़े-लिखे समाज को संदेश
विजय जी आज के पढ़े-लिखे समाज, जो बाबाओं और भगवान में विश्वास नहीं करते, उन्हें एक स्पष्ट संदेश देती हैं।
“मैं अपने PhD किए हुए विद्यार्थियों से भी कहूँगी कि यह जो तुम्हें अहंकार है कि हम पढ़े-लिखे हैं, हम क्यों जाएं बाबाओं के पास, यह ठीक है क्योंकि कई संतों ने लोगों को फंसाया है। लेकिन संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान को अनुभव करके देखो। आज देश में कोरोना से लोग क्यों मर रहे हैं? वैज्ञानिक वैक्सीनेशन दे रहे हैं, फिर भी लोग क्यों मर रहे हैं? उस भगवान की शरण में जाओ, जो संत रामपाल जी महाराज के रूप में मिलेगा।”
वह याद दिलाती हैं कि भगवान राम और कृष्ण ने भी गुरु बनाए थे, क्योंकि गुरु के बिना मोक्ष संभव नहीं है।
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विजय जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।
FAQ
प्रश्न 1: एक रिटायर्ड प्रिंसिपल होने के बावजूद विजय जी को गुरु की शरण में क्यों जाना पड़ा?
उत्तर: उन्हें बचपन से अध्यात्म में रुचि थी, लेकिन उन्हें किसी भी गुरु या ग्रंथ से मन की शांति और पूर्ण ज्ञान नहीं मिला। जब उनके जीवन में कैंसर जैसी बड़ी आपदा आई, तो उन्हें एक सच्चे गुरु की आवश्यकता महसूस हुई।
प्रश्न 2: संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान अन्य संतों से अलग कैसे है?
उत्तर: विजय जी के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज का ज्ञान हमारे पवित्र सदग्रंथों (जैसे वेद, गीता, पुराण) को खोलकर, प्रमाण सहित समझाते हैं, जबकि अन्य संत ऐसा नहीं करते।
प्रश्न 3: क्या संत रामपाल जी महाराज कैंसर जैसी बीमारियाँ ठीक करने के पैसे लेते हैं?
उत्तर: विजय जी स्पष्ट रूप से बताती हैं कि यह Fake News है। उनका कैंसर बिना किसी पैसे के, केवल गुरु के आशीर्वाद और सही भक्ति विधि से ठीक हुआ।

