जब डॉक्टर किसी बीमारी का एकमात्र इलाज ऑपरेशन बताएं और वह बीमारी बिना किसी दवा या सर्जरी के अपने आप ठीक हो जाए, तो इसे आप क्या कहेंगे? यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की श्रीमती रितु वर्मा जी के जीवन की सच्ची हकीकत है।
यह कहानी दृढ़ विश्वास, अटूट आस्था और एक पूर्ण संत की भक्ति की उस शक्ति की है, जिसके सामने कैंसर और गांठ जैसी बीमारियों को भी घुटने टेकने पड़े।
आप रितु जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।
दर्द और बीमारियों से भरा जीवन
संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले रितु जी का जीवन शारीरिक कष्टों से भरा हुआ था। वह सभी देवी-देवताओं की पूजा करती थीं, सोमवार, दुर्गा माता, शनिदेव, साईं बाबा समेत कई व्रत रखती थीं और तीर्थों पर भी जाती थीं, लेकिन उन्हें कहीं से कोई राहत नहीं मिली।
- लगातार शारीरिक दर्द: उन्हें सिर में, कमर में और छाती में लगातार दर्द बना रहता था। शाम होते ही सिर दर्द इतना बढ़ जाता था कि उन्हें टेबलेट लेकर ही घर का काम करना पड़ता था।
- गले का कैंसर: उनके गले में कैंसर हो गया था। आयुर्वेदिक इलाज से कुछ समय के लिए आराम मिला, लेकिन डेढ़-दो साल बाद वह फिर से उभर आया।
इन सब परेशानियों से वह पूरी तरह टूट चुकी थीं।
एक किताब जिसने दिखाई जीवन की नई राह
निराशा के इसी दौर में, एक दिन उनके पति “जीने की राह” पुस्तक घर लेकर आए। रितु जी बताती हैं, “मैंने जब उसे पढ़ना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगा। पूरा ज्ञान समझ में आ गया कि कबीर साहेब ही पूर्ण परमात्मा हैं और संत रामपाल जी महाराज उन्हीं के रूप में आए हैं।”
इस ज्ञान से प्रभावित होकर उन्होंने 19 सितंबर 2020 को संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ले ली।
भक्ति की शक्ति: जब बीमारियों ने घुटने टेके
नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में भक्ति करने के बाद रितु जी के जीवन में जो हुआ, वह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
1. गले का कैंसर बिना दवा के ठीक
जब गले का कैंसर दोबारा उभरा और डॉक्टरों ने ऑपरेशन ही एकमात्र उपाय बताया, तो रितु जी ने ऑपरेशन कराने से इंकार कर दिया। उन्होंने घर पर ही मन-ही-मन संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना की, “हे परमात्मा! मुझे कहीं नहीं जाना, न डॉक्टर के पास, न किसी तांत्रिक के पास। आप ही ठीक करोगे।” और कुछ ही समय में, बिना एक रुपये की दवा खाए, उनका गले का कैंसर अपने आप ठीक हो गया।
2. हाथ की गांठ बिना ऑपरेशन ठीक
इसके कुछ समय बाद, उनके हाथ पर एक गांठ उभरी और सूजन आ गई। सोनोग्राफी कराने पर डॉक्टर ने इसका भी एकमात्र इलाज ऑपरेशन ही बताया। रितु जी ने फिर से संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना लगाई। वह बताती हैं, “मैं खुद आश्चर्यचकित हूँ कि एक हफ्ते बाद ही वह गांठ अपने आप फूटकर ठीक हो गई। इसमें भी मैंने एक रुपये का खर्च नहीं किया।”
आज वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं और एक खुशहाल जीवन जी रही हैं।
रितु जी का समाज को संदेश
रितु वर्मा जी उन सभी लोगों से, जो किसी भी बीमारी से ग्रस्त हैं, हाथ जोड़कर निवेदन करती हैं, “मैं सभी से यही कहना चाहूंगी कि जो भी किसी बीमारी से परेशान है, वह संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर उनकी शरण में आएं और अपना कल्याण कराएं।”
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रितु जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।
FAQ
प्रश्न 1: रितु वर्मा को कौन-कौन सी गंभीर बीमारियाँ थीं?
उत्तर: उन्हें लगातार शारीरिक दर्द के अलावा गले में कैंसर और हाथ में एक गांठ थी, जिसके लिए डॉक्टरों ने ऑपरेशन बताया था।
प्रश्न 2: उनकी बीमारियाँ बिना ऑपरेशन के कैसे ठीक हुईं?
उत्तर: रितु जी के अनुसार, यह संत रामपाल जी महाराज पर पूर्ण विश्वास और उनके द्वारा दी गई शास्त्र-अनुकूल भक्ति विधि से ही संभव हुआ। उन्होंने केवल प्रार्थना की और परमात्मा ने उनकी लाइलाज बीमारियों को जड़ से खत्म
प्रश्न 3: कोई व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकता है?
उत्तर: आप विभिन्न टीवी चैनलों पर उनका सत्संग देख सकते हैं। सत्संग के दौरान स्क्रीन पर एक पीली पट्टी चलती है, जिस पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करके आप अपने नज़दीकी नामदान केंद्र का पता लगाकर निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

