ज़िंदगी जब इम्तिहान लेती है, तो कभी-कभी इंसान पूरी तरह से टूट जाता है। ऐसी ही एक कहानी है मध्य प्रदेश के भिंड जिले की रहने वाली प्रीति राठौर जी की, जिनकी ज़िंदगी दुख, परेशानी और गरीबी के अंधेरे में डूबी हुई थी। लेकिन फिर उन्हें एक ऐसी रोशनी मिली जिसने उनकी पूरी दुनिया बदल कर रख दी।
यह कहानी सिर्फ एक चमत्कार की नहीं, बल्कि विश्वास और सही भक्ति की शक्ति की है।
आप प्रीति जी की पूरी आपबीती, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।
जब हर दरवाज़े पर मिली सिर्फ निराशा
संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में आने से पहले, प्रीति जी का जीवन मुश्किलों का पहाड़ था। वह बताती हैं, “हम काल की पूजा करते थे, शंकर जी पर जाते थे, माता पर भी जाते थे, और झाड़-फूंक करने वाले भगतों के पास भी भटकते थे।” लेकिन इतनी पूजा-पाठ के बावजूद, उनकी ज़िंदगी में कोई सुधार नहीं आया।
उनकी परेशानियां एक नहीं, अनेक थीं:
- आर्थिक तंगी: घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमज़ोर थी। पैसा पानी की तरह बह रहा था, लेकिन समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही थीं।
- बेटी की बीमारी: उनकी बेटी जन्म से ही गूंगी-बहरी थी। 7 साल की उम्र तक वह न बोल पाती थी, न सुन पाती थी। डॉक्टरों ने कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन का सुझाव दिया, जिसका खर्च ₹8-9 लाख था, जो प्रीति जी के परिवार के लिए एक सपने जैसा था।
- बेटे की परेशानी: उनके बेटे को भी जन्म से बाथरूम से जुड़ी एक गंभीर समस्या थी, जिसके लिए कई ऑपरेशन करवाने पड़े लेकिन पूरा आराम नहीं मिला।
प्रीति जी कहती हैं, “हम बिलकुल लुट-पिट गए थे, बहुत ही ज़्यादा परेशान थे।” हर तरफ से निराशा ही हाथ लग रही थी।
एक मुलाक़ात जिसने सब कुछ बदल दिया
जब सारे दरवाज़े बंद हो जाते हैं, तब परमात्मा किसी न किसी रूप में रास्ता दिखाता है। प्रीति जी की मुलाक़ात संत रामपाल जी महाराज के एक शिष्य से हुई। उन्होंने प्रीति जी को हरियाणा के सतलोक आश्रम, बरवाला जाकर नाम दीक्षा लेने की सलाह दी और विश्वास दिलाया कि उनकी बेटी ठीक हो जाएगी।
एक उम्मीद की किरण के साथ, प्रीति जी अपने परिवार के साथ सतलोक आश्रम, बरवाला पहुंच गईं और संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा ली। उन्हें नहीं पता था कि यह फैसला उनकी ज़िंदगी में चमत्कारों की शुरुआत करने वाला था।
भक्ति की शक्ति से हुए असंभव चमत्कार
नाम दीक्षा लेने और सत्य भक्ति करने के बाद प्रीति जी की ज़िंदगी 360 डिग्री घूम गई। जो चीज़ें कल तक असंभव लगती थीं, वह एक-एक करके सच होने लगीं।
1. गूंगी-बहरी बेटी को मिली आवाज़ और ज़िंदगी
सबसे बड़ा चमत्कार उनकी बेटी के साथ हुआ। जिस ऑपरेशन के लिए उनके पास पैसे नहीं थे, संत रामपाल जी महाराज की दया से उनके सरकारी कागज़ बन गए। अनुराधा तिवारी जी की तरह, जिनके जीवन में भी भक्ति से बदलाव आया, प्रीति जी ने भी रिश्वत देने से साफ़ मना कर दिया। बिना एक पैसा रिश्वत दिए, उनकी बेटी के ऑपरेशन के लिए सरकारी हस्पताल से ₹6.5 लाख मंज़ूर हो गए।
आज वह बेटी न सिर्फ सुनती है, बल्कि साफ़-साफ़ “मम्मी-पापा” और “सत साहेब” भी बोलती है।
2. पति की छूटी बुरी आदतें और बीमारी
प्रीति जी के पति (भगत जी) को नशे की आदत थी। लेकिन संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने के बाद उन्होंने नशे को हमेशा के लिए त्याग दिया। कुछ समय बाद उन्हें 600 तक हाई शुगर हो गई और वह बेहद कमज़ोर हो गए, लेकिन भक्ति और परमात्मा की दया से आज वह भी बिलकुल स्वस्थ हैं।
3. ख़ाली बैंक खाते में आए ₹1 लाख
गर्मियों में बच्चे ठंडे पानी के लिए रोते थे, लेकिन परिवार के पास एक पुराना फ्रिज खरीदने तक के पैसे नहीं थे। प्रीति जी बताती हैं कि उनके पास सिर्फ ₹2000 बचे थे और वह बहुत रो रही थीं। जब उन्होंने एटीएम जाकर चेक किया, तो उनके होश उड़ गए।
“हमारे अकाउंट में संत रामपाल जी महाराज की दया से ₹1,02,000 मिले। हम पुराना फ्रिज नहीं ले पा रहे थे, और मालिक की दया से हमने ₹17,500 का नया फ्रिज उठाया।”
4. बच्चे की पढ़ाई के लिए मिला नया फ़ोन
लॉकडाउन के दौरान, जब ऑनलाइन क्लासेज़ शुरू हुईं, तो प्रीति जी के पास अपने बेटे को पढ़ाने के लिए स्मार्टफोन नहीं था। वह पुराने फ़ोन के लिए भटक रही थीं, लेकिन परमात्मा की लीला देखिए, उन्हें ₹14,000 का एक नया फ़ोन मिला।
प्रीति जी का समाज के लिए दिल से संदेश
अपनी कहानी बताते हुए प्रीति राठौर जी हाथ जोड़कर सभी भाई-बहनों से निवेदन करती हैं, “जो लोग मेरी तरह दुखी और परेशान हैं, वह गलत पूजा-पाठ छोड़कर संत रामपाल जी महाराज जी की शरण में आएं। आप अपने नज़दीकी नामदान सेंटर पर संपर्क करके नाम दीक्षा लें और सत्य भक्ति करके अपना कल्याण कराएं।”
प्रीति जी की कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि अगर भक्ति सच्ची हो और गुरु पूरा हो, तो असंभव भी संभव हो जाता है।
Frequently asked questions (FAQ)
प्रश्न 1: प्रीति राठौर जी को संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले क्या समस्याएं थीं?
उत्तर: उन्हें गंभीर आर्थिक तंगी, जन्म से गूंगी-बहरी बेटी और बीमार बेटे जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
प्रश्न 2: क्या संत रामपाल जी से नाम दीक्षा लेने का कोई शुल्क लगता है?
उत्तर: जी नहीं, संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी जाने वाली नाम दीक्षा पूरी तरह से निःशुल्क होती है।
प्रश्न 3: कोई व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकता है?
आप साधना टीवी पर सत्संग सुनकर या अपनी नज़दीकी नामदान सेंटर पर जाकर आसानी से नाम दीक्षा ले सकते हैं।

