9 साल पुरानी पाइल्स बिना दवा के ठीक, 7 लाख का फ्लैट खरीदा: भक्ति छोड़ने के बाद लौटी महिला की कहानी

9 साल पुरानी पाइल्स बिना दवा के ठीक, 7 लाख का फ्लैट खरीदा: भक्ति छोड़ने के बाद लौटी महिला की कहानी

क्या कभी ऐसा हो सकता है कि सही रास्ता मिलने के बाद उसे छोड़ देने पर ज़िंदगी पहले से भी बदतर हो जाए? यह कहानी है ग्वालियर, मध्य प्रदेश की सरिता वर्मा जी की, जिनकी ज़िंदगी एक ऐसे ही उतार-चढ़ाव का जीता-जागता उदाहरण है।

यह कहानी भक्ति की शक्ति, एक पूर्ण गुरु की शरण के महत्व और दोबारा सही मार्ग पर लौट आने के बाद हुए चमत्कारों की है।

आप सरिता जी की पूरी आपबीती, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।

भक्ति छोड़ी तो जीवन में आया भूचाल

सरिता जी ने 2004 में संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ली थी, लेकिन ग्वालियर शिफ्ट होने के कारण उनका भक्ति मार्ग से संपर्क टूट गया। इसके बाद उनके जीवन में एक के बाद एक ऐसी मुश्किलें आईं, जिन्होंने उन्हें तोड़कर रख दिया।

  • परिवार में भीषण tragedia: एक सड़क हादसे में उनके परिवार के 12 लोग एक साथ खत्म हो गए, जिसके बाद 5 साल तक उन्होंने अपने माता-पिता का बिज़नेस संभाला।
  • आर्थिक संकट: उनके पति की प्राइवेट नौकरी छूट गई और घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई।
  • बेटे की गंभीर बीमारी: उनके 8 महीने के बेटे को फिट्स (दौरे) पड़ने लगे। इलाज के बाद भी जब वे ग्वालियर शिफ्ट हुईं, तो बीमारी और ज़्यादा बढ़ गई और बेटे को दिन में कई-कई बार दौरे पड़ने लगे।
  • खुद की लाइलाज बीमारियाँ: सरिता जी को 9 साल से पाइल्स (बवासीर) की गंभीर समस्या थी, जिसका बड़े-बड़े डॉक्टरों से इलाज कराने के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ। इसके अलावा, उनके पैरों की एड़ियों की हड्डी बढ़ गई थी, जिस वजह से वह ठीक से चल भी नहीं पाती थीं।

सरिता जी बताती हैं कि उनका जीवन बस घर और दुकान तक सिमट कर रह गया था और हर तरफ निराशा थी।

एक पुकार जिसने फिर से रास्ता दिखाया

जब हर तरफ से मुश्किलें बढ़ गईं, तब सरिता जी को परमात्मा ने फिर से प्रेरणा दी। उन्होंने 2013 में दोबारा संत रामपाल जी महाराज की शरण में जाने का फैसला किया और दिल्ली जाकर फिर से नाम दीक्षा ली।

दोबारा जुड़ने के बाद हुए चमत्कार ही चमत्कार

भक्ति मार्ग पर दोबारा लौटते ही सरिता जी का जीवन पूरी तरह से बदल गया। जो समस्याएं सालों से उनका पीछा नहीं छोड़ रही थीं, वे एक-एक कर खत्म होने लगीं।

1. 9 साल पुरानी पाइल्स बिना दवा के ठीक

जिस पाइल्स की बीमारी के लिए डॉक्टरों ने जीवन भर इलाज की गारंटी ली थी और फिर भी आराम नहीं मिला, वह बीमारी संत रामपाल जी महाराज को केवल एक प्रार्थना लगाने से जड़ से खत्म हो गई। पिछले 6-7 साल से उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

2. बेटे को दौरों से मिली मुक्ति

जिस बेटे को दिन में कई बार दौरे पड़ते थे, भक्ति की शक्ति से आज वह पूरी तरह से स्वस्थ है।

3. पैरों का दर्द हुआ गायब

एड़ियों की हड्डी बढ़ने के कारण जिस दर्द से वह चल नहीं पाती थीं, आज वह दर्द भी पूरी तरह से ठीक हो चुका है।

4. आर्थिक तंगी खत्म, खरीदा 7 लाख का फ्लैट

संत रामपाल जी की दया से उन्होंने अपनी एक छोटी सी दुकान शुरू की, जो आज बहुत अच्छी चल रही है। उसी दुकान की कमाई से आज वह अपना पूरा घर चला रही हैं और उन्होंने ₹7 लाख का फ्लैट भी खरीद लिया है।

सरिता जी का समाज को संदेश

सरिता जी कहती हैं, “संत रामपाल जी महाराज की भक्ति शास्त्र-प्रमाणित है। अगर हम मर्यादा में रहकर यह भक्ति करेंगे तो हमारे ऊपर किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं आएगा। हम जो दूसरी पूजा करते हैं, उनसे हमें अपने पूर्व जन्मों के पुण्य का ही लाभ मिलता है जो खत्म हो जाता है, लेकिन यह भक्ति हमें नए पुण्य और परमात्मा की शक्ति प्रदान करती है।”

और सच्ची कहानियाँ पढ़ें

सरिता जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।

FAQ

प्रश्न 1: भक्ति मार्ग छोड़ने के बाद सरिता जी की समस्याएं क्यों बढ़ गईं?

उत्तर: उनके अनुसार, अन्य पूजाओं से हमें केवल पूर्व जन्मों के पुण्य का अस्थायी लाभ मिलता है। जब पुण्य खत्म हो जाते हैं और हम शास्त्र-विरुद्ध साधना करते हैं, तो कष्ट बढ़ जाते हैं।

प्रश्न 2: क्या संत रामपाल जी महाराज रोग दूर करने के पैसे लेते हैं?

उत्तर: सरिता जी स्पष्ट रूप से बताती हैं कि यह बिल्कुल गलत है। उनकी 9 साल पुरानी बीमारी केवल प्रार्थना से ठीक हुई और इसके लिए कोई पैसा नहीं लिया गया।

प्रश्न 3: कोई व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकता है?

उत्तर: आप विभिन्न टीवी चैनलों पर उनका सत्संग देख सकते हैं। सत्संग के दौरान स्क्रीन पर एक पीली पट्टी चलती है, जिस पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करके आप अपने नज़दीकी नामदान केंद्र का पता लगाकर निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

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