Rajendra Singh Sengar का जन्म उत्तर प्रदेश (UP) में हुआ, जहाँ उनका प्रारंभिक जीवन पारिवारिक मूल्यों और धार्मिक संस्कारों के साथ बीता। जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों ने उन्हें आगे चलकर Pune में बसने के लिए प्रेरित किया। वहीं, अपने कर्मठ स्वभाव के चलते उन्होंने अनेक क्षेत्रों में नौकरी की और हर ज़िम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया। हालाँकि, उनके बचपन से ही मन में आध्यात्मिक प्रश्न उठते रहे – वह यह कि 33 करोड़ देवी-देवताओं की मान्यता रखने वाले समाज में वास्तव में परमात्मा कौन है?
प्रारंभिक धार्मिक संस्कार और प्रश्नों की शुरुआत
Rajendra Singh Sengar का बचपन आम हिंदू परिवारों की तरह बीता, जहाँ शिवरात्रि, नवरात्रि और जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर व्रत-पूजा करना एक सामान्य बात थी। शिवलिंग पर जल चढ़ाना, दुर्गा माता की उपासना करना और श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पर उपवास रखना, उनकी प्रारंभिक धार्मिक दिनचर्या का हिस्सा था। लेकिन समय के साथ उन्हें एहसास होने लगा कि वे केवल पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन कर रहे हैं; इसके पीछे का वास्तविक सत्य उन्हें कोई नहीं बता पा रहा था। इसी जिज्ञासा ने उनके भीतर एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया—“क्या इन अनेकों देवी-देवताओं में से एक ही परमात्मा है, जो सर्वोपरि है? यदि हाँ, तो वह कौन है?”
इन प्रश्नों का कोई ठोस उत्तर न मिलने के कारण Rajendra ने धीरे-धीरे पारंपरिक पूजा-पाठ बंद कर दिया। हालाँकि, उनके भीतर सत्य की खोज कभी रुकी नहीं—वह निरंतर सोचते रहे कि कहीं तो कोई होगा जो इन प्रश्नों का उत्तर दे सके।
करियर का सफ़र: Military से लेकर Central Excise तक
Rajendra Singh Sengar ने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा भारत की Military में सेवा करते हुए बिताया। वहाँ उन्होंने Junior Commissioned Officer के रूप में देश की रक्षा में अहम भूमिका निभाई। सेना में अनुशासन, दृढ़ता और परिश्रम से उन्होंने अपने दायित्व पूरे किए। हालाँकि, कुछ पारिवारिक और व्यक्तिगत कारणों के चलते उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (V.R.S.) ले ली।
इसके बाद उन्होंने Punjab National Bank में Clerk-Cashier के रूप में काम किया। बैंक की नौकरी सरकारी लाभ और स्थिरता के लिए जानी जाती है, परंतु Rajendra singh और ही तलाश में थे। उन्होंने यह नौकरी भी छोड़ दी और आगे चलकर Central Excise विभाग में Inspector बने। अपने कर्तव्य-निष्ठ स्वभाव और कौशल के कारण वे जल्द ही पदोन्नत होकर Superintendent बने। अंततः वर्ष 2015 में वह सेवानिवृत्त हो गए।
पुणे में बसने का फैसला और नए मोड़ की तलाश
Military व अन्य नौकरियों के बाद Rajendra सिंह पुणे में स्थायी रूप से बस गए। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें लगा कि अब उनके पास अपने उन प्रश्नों के उत्तर ढूँढने का समय होगा, जो बचपन से उन्हें परेशान करते थे। हालाँकि, व्यावहारिक जीवन की ज़िम्मेदारियाँ और पारिवारिक दायित्व भी कम नहीं थे—फिर भी मन की गहराइयों में छिपी परमात्मा की तलाश कभी सूनी नहीं पड़ी।
यहीं, उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब उनकी बेटी ने उन्हें Sant Rampal Ji Maharaj द्वारा लिखित पुस्तक “ज्ञान गंगा” (Gyan Ganga) पढ़ने को दी। उन्होंने सोचा कि शायद यही वह सूत्र हो सकता है जो उन्हें उनके प्रश्नों के उत्तर प्रदान करे।
“ज्ञान गंगा ” पढ़ने से जन्मी नई प्रेरणा
जैसे ही Rajendra singh “ज्ञान गंगा” के कुछ पन्ने पढ़ना शुरू किए, उन्हें ऐसा लगा मानो वे किसी अज्ञात द्वार को खोल रहे हों। चार-पाँच दिनों तक उन्होंने दिन-रात इस पुस्तक का अध्ययन किया। इसमें मिले शास्त्रों के प्रमाण, तुलनात्मक विश्लेषण और तर्कसंगत दृष्टिकोण ने उनके मन में गहरा प्रभाव डाला। इसी दौरान उन्हें समझ आया कि सृष्टि का मालिक केवल एक ही परमात्मा है, जिसका वर्णन वेदों और अन्य पवित्र ग्रंथों में भी मिलता है।
पुस्तक का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि उन्होंने Non-veg छोड़ने का तुरंत फैसला कर लिया। एक दिन उन्हें किसी ने नाश्ते में अंडा दिया तो उन्होंने साफ़ मना कर दिया, यह कहकर कि अब वे माँसाहार किसी भी हालत में नहीं करेंगे। इस निर्णय से उनके परिवार में भी आश्चर्य की लहर थी, लेकिन Rajendra singh अपने नए पथ पर पूर्ण विश्वास था।
Naam Diksha : 16 January, 2019
पुस्तक पढ़ने के बाद राजेंद्र अपनी बेटी से Sant Rampal Ji Maharaj के बारे में विस्तार से जानना चाहते थे। उन्होंने पता लगाया कि Pune में ही एक Naamdaan Kendra है, जहाँ Sant Rampal Ji Maharaj से Naam Diksha ली जा सकती है। राजेंद्र ने तुरंत वहाँ जाने का निश्चय किया और 16 January, 2019 को उन्होंने Sant Rampal Ji Maharaj से Naam Diksha प्राप्त की।
इस Naam Diksha के दौरान उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि परमात्मा की भक्ति कैसे करनी चाहिए, किन बातों को ध्यान में रखना चाहिए और किन आदतों को त्यागना चाहिए। यहाँ उन्हें यह भी समझ आया कि सही आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए कुछ त्याग जरूरी हैं—जैसे नशा, मांसाहार, व्यभिचार इत्यादि।
स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ: एक कठिन दौर
Rajendra Singh Sengar का पारिवारिक जीवन पहले काफ़ी सुखद था, लेकिन 2003 के बाद उन्हें कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे उन्हें समझ आने लगा कि किसी वजह से उनकी सेहत लगातार गिरती जा रही है।
- हृदय रोग:
- वर्ष 2017 में, उन्हें चलने-फिरने पर सीने में दर्द होने लगा। जाँच कराने पर पता चला कि उनकी आर्टरीज़ में 90% तक Blockages हैं। डॉक्टरों ने तुरंत Angioplasty करने का फैसला लिया और तीनों ब्लॉकेज को Stent डालकर खोल दिया।
- उन्हें आजीवन दवाइयाँ लेने की सलाह मिली और चेतावनी दी गई कि दवा बंद करने पर समस्या दोबारा गंभीर हो सकती है।
- अधिक दवाइयों पर निर्भरता:
- Angioplasty के बाद Rajendra को कई तरह की दवाइयाँ दी गईं, जिनका नियमित सेवन उन्हें अनिवार्य बताया गया।
- 2020 में, जब Lockdown लगा, तब उनके गाँव में दवाइयाँ मिलना मुश्किल हो गया। उन्हें मजबूरन दवाइयाँ छोड़नी पड़ीं। हालाँकि, उस समय तक उन्होंने Sant Rampal Ji Maharaj से Naam Diksha ले ली थी, इसलिए उन्होंने परमात्मा से प्रार्थना की और पूरी तरह से दवाइयाँ लेना बंद कर दिया।
- अन्य स्वास्थ्य लाभ:
- Urine Frequency: पहले Rajendra को रात में बार-बार पेशाब जाने की दिक्कत थी, जिसके लिए उन्होंने कई बार डॉक्टरों से जाँच करवाई, लेकिन समस्या बनी रही। Naam Diksha लेने के कुछ समय बाद वह शिकायत स्वतः दूर हो गई।
- Erection Dysfunction (ED): यह समस्या भी धीरे-धीरे कम होकर पूरी तरह ठीक हो गई, बिना किसी अतिरिक्त चिकित्सा के।
- Cold और Cough से मुक्ति: जहाँ पहले मौसम बदलने पर उन्हें सर्दी-खाँसी हो जाया करती थी, वहीं अब उन्हें यह समस्या नहीं रहती।
इन सब बदलावों ने Rajendra को गहराई से विश्वास दिला दिया कि जो मार्ग उन्होंने चुना है, वह सही है। वह कहते हैं कि दवाइयाँ छोड़ने के बाद भी आज तक उन्हें कोई दिक्कत महसूस नहीं हुई। उनका रक्तचाप सामान्य रहता है और हृदय रोग के लक्षण भी दोबारा सामने नहीं आए हैं।
नशे से मुक्ति: दृढ़ संकल्प का परिचय
Rajendra ने अपने Military के दिनों में शराब पीना शुरू किया था, हालाँकि 2003 में स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने यह आदत छोड़ दी। लेकिन Non-veg का सेवन वे नामदेक्षा लेने से पहले तक कभी-कभी किया करते थे। ‘ज्ञान गंगा’ पढ़ने के बाद, जब उन्हें इस बात का बोध हुआ कि सच्चे अध्यात्म और मांसाहार एक साथ नहीं चल सकते, उन्होंने तुरंत Non-veg त्याग दिया।
इतना ही नहीं, Naam Diksha के दिन उन्होंने Canteen से छह बोतल Rum ख़रीदी थीं। लेकिन जब उन्हें बताया गया कि शिष्य को स्वयं नशा छोड़ने के साथ-साथ किसी और को नशा करने में मदद भी नहीं करनी चाहिए, तो उन्होंने घर पहुँचकर उन बोतलों को शौचालय में बहा दिया। यह कदम उठाना आसान नहीं था, परंतु परमात्मा की आराधना का दृढ़ संकल्प उन्हें इस राह पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा था।
आध्यात्मिक संदेश और प्रेरणा
Rajendra Singh Sengar का कहना है कि जिन लोगों को परमात्मा की वास्तविक खोज है, उन्हें सबसे पहले सही ज्ञान को परखना चाहिए। वह सलाह देते हैं कि लोग “ज्ञान गंगा” जैसी आध्यात्मिक पुस्तकों और Sant Rampal Ji Maharaj के सत्संग को ध्यान से सुनें। यदि उन्हें यह ज्ञान प्रमाणित और उपयुक्त लगे, तो वे भी Naam Diksha लेकर अपने जीवन को सुधार सकते हैं।
उनका अनुभव यह बताता है कि सिर्फ़ कर्मकांडों को अपनाने से मन की शांति नहीं मिलती, बल्कि आध्यात्मिक सत्य को समझने और जीवन में उतारने से जीवन में वास्तविक बदलाव आता है। उनका मानना है कि सही ज्ञान के अभाव में व्यक्ति तरह-तरह की आदतों और बीमारियों से घिरा रहता है, लेकिन जैसे ही वह परमात्मा के सही स्वरूप को पहचानकर उसकी शरण में जाता है, उसे आध्यात्मिक के साथ-साथ भौतिक और मानसिक लाभ भी होने लगते हैं।
निष्कर्ष: एक अनोखी यात्रा
Rajendra Singh Sengar की कहानी यह दर्शाती है कि यदि व्यक्ति के पास सही मार्गदर्शन और प्रामाणिक ज्ञान हो, तो वह अपनी सबसे गहरी परेशानियों से भी बाहर निकल सकता है। शराब और मांसाहार जैसी आदतें, हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियाँ – इन सबसे छुटकारा तभी संभव हुआ जब उन्हें सच्चे ज्ञान की रोशनी मिली।
उनकी यात्रा हमें प्रेरित करती है कि चाहे जीवन में कितनी भी चुनौतियाँ हों, अगर हम परमात्मा की खोज के लिए समर्पित हो जाएँ, तो हमें अवश्य ही वह मार्ग मिलता है जो अंततः उद्धार की ओर ले जाता है। Rajendra मानते हैं कि दुनिया के हर व्यक्ति में परमात्मा की चाहत होती है, बस ज़रूरत है इस चाहत को सही दिशा देने की।
इस तरह, Rajendra Singh Sengar की आध्यात्मिक खोज हम सभी को संदेश देती है कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए, व्यक्ति न केवल अपने रोगों और बुरी आदतों से मुक्त हो सकता है, बल्कि मोक्ष की ओर अग्रसर हो जाता है।

