उत्तराखंड के सुरेंद्र सिंह, अपनी बहन की पहले और बाद की तस्वीरें दिखाते हुए।

पिता की सिद्धियां फेल, बेटे ने पाया सच्चा गुरु! डॉक्टरों ने दिया जवाब, फिर भक्ति से बची बहन की जान

क्या हो जब एक परिवार का मुखिया सिद्धियों का मालिक हो, लोगों की बीमारियाँ ठीक करने का दावा करे, लेकिन उसका अपना ही परिवार दुखों और बीमारियों से घिरा हो? यह चौंकाने वाली लेकिन सच्ची कहानी है उत्तराखंड के रुद्रपुर निवासी श्री सुरेंद्र सिंह जी की।

यह कहानी एक ऐसे भक्त की है जो खुद नशे में डूबा था, जिसका परिवार एक झूठे भक्ति मार्ग पर चलकर लुट रहा था, और कैसे एक यूट्यूब वीडियो ने उसे उस पूर्ण परमात्मा का रास्ता दिखाया जिसने उसके परिवार को मौत के मुँह से वापस खींच लिया।

आप सुरेंद्र जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।

सिद्धियों का दिखावा और दुखों से भरा जीवन

संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले सुरेंद्र जी का परिवार राधा स्वामी पंथ (ब्यास) से जुड़ा था। उनके पिता 1984 से दीक्षित थे और गुरु ग्रन्थ साहिब का पाठ भी करते थे।

  • पिता की सिद्धियां: सुरेंद्र जी बताते हैं कि उनके पिता में कुछ सिद्धियां आ गई थीं, जिससे वह लोगों की भूत-प्रेत बाधा और अन्य समस्याओं का इलाज करते थे। लोग उनके पास औलाद मांगने भी आते थे।
  • घर में अशांति: इन सिद्धियों के बावजूद, घर में दिन-प्रतिदिन परेशानी बढ़ रही थी। उनकी माँ अक्सर बीमार रहती थीं और परिवार हमेशा दुखी रहता था।
  • भंडारों में बर्बादी: हर साल वे अपने घर से ₹50-60 हज़ार खर्च करके भंडारे और जागरण करवाते थे, जिससे वे आर्थिक रूप से भी लुट रहे थे।
  • खुद का जीवन: सुरेंद्र जी खुद भी गुरु ग्रन्थ साहिब का बहुत पाठ करते थे, लेकिन साथ ही शराब, मांस-मीट और तम्बाकू जैसे हर तरह के नशे करते थे। उनकी किराने की दुकान पर तम्बाकू बेचना भी उनका काम था।

एक यूट्यूब वीडियो जिसने खोल दीं आँखें

एक दिन अपनी दुकान पर बैठे हुए सुरेंद्र जी यूट्यूब देख रहे थे। उन्होंने संत रामपाल जी महाराज का एक सत्संग देखा जिसमें वह राधा स्वामी पंथ द्वारा दिए जाने वाले पाँच नामों का विश्लेषण कर रहे थे। जब संत जी ने प्रमाण सहित बताया कि “सतनाम” का जो जाप वे कर रहे हैं, वह गलत है, तो सुरेंद्र जी वहीं अटक गए।

उन्होंने तुरंत अपनी पत्नी से इस बारे में बात की और उसी क्षण उस झूठे नाम और भक्ति मार्ग को त्यागने का फैसला कर लिया। पहले उन्होंने अपने “सिद्धियों” वाले पिता को बरवाला आश्रम भेजा, जहाँ उन्होंने नाम दीक्षा ली। इसके बाद 10 अक्टूबर 2014 को सुरेंद्र जी ने भी अपनी पत्नी के साथ संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा ग्रहण की।

सच्ची भक्ति से मिले वो लाभ जो सिद्धियों से नहीं मिले

नाम दीक्षा लेकर मर्यादा में भक्ति करने के बाद सुरेंद्र जी के जीवन में वास्तविक चमत्कारों की शुरुआत हुई।

1. बहन को मिला मौत के मुँह से जीवनदान

उनकी बहन को किसी दवा से इतना भयंकर एलर्जिक रिएक्शन हुआ कि उसका पूरा शरीर सूज गया, आँखें बंद हो गईं और डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। डॉक्टरों ने एक “ज़हर को काटने वाले ज़हर का इंजेक्शन” यह कहकर लगाया कि बचने के कोई चांस नहीं हैं। लेकिन परिवार ने संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना लगाई और उनकी बहन दो घंटे में ही ठीक होने लगी। 15 दिन में वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई, जिसे देखकर डॉक्टर भी हैरान थे।

2. बिना ऑपरेशन ठीक हुई गांठ, बचे ₹70,000

सुरेंद्र जी के शरीर में एक गांठ थी जिससे 24 घंटे पस निकलता रहता था। डॉक्टरों ने ऑपरेशन का खर्च ₹60-70 हज़ार बताया। सुरेंद्र जी ने ऑपरेशन कराने से मना कर दिया और केवल संत रामपाल जी पर विश्वास रखा। आज वह गांठ बिना किसी दवा या ऑपरेशन के पूरी तरह ठीक हो चुकी है।

3. हर प्रकार के नशे से मिली मुक्ति

नाम दीक्षा लेते ही सुरेंद्र जी ने शराब, मांस और तम्बाकू को हमेशा के लिए त्याग दिया। उन्होंने अपनी दुकान से तम्बाकू के बोरे भरकर नदी में फेंक दिए और आज कोई उन्हें करोड़ों रुपये भी दे तो वह इन चीज़ों को हाथ नहीं लगाते।

सुरेंद्र जी का समाज को संदेश

सुरेंद्र जी कहते हैं, “यह संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिए गए शास्त्र-अनुकूल नाम मंत्र की शक्ति है, जो हर नशा और विकार छुड़वा देती है। मैं सभी दुखी और परेशान लोगों से प्रार्थना करता हूँ कि वे संत रामपाल जी महाराज का अनमोल ज्ञान सुनें और नाम दीक्षा लेकर अपना कल्याण कराएं।”

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सुरेंद्र जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।

FAQ

प्रश्न 1: सुरेंद्र जी के पिता में सिद्धियां होने के बावजूद परिवार दुखी क्यों था?

उत्तर: सुरेंद्र जी के अनुसार, उनके पिता की भक्ति शास्त्र-विरुद्ध थी। ऐसी भक्ति से प्राप्त सिद्धियां अस्थायी होती हैं और परिवार का भला नहीं कर सकतीं, बल्कि कर्म बंधन को और बढ़ाती हैं।

प्रश्न 2: उनकी बहन की जान कैसे बची जब डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था?

उत्तर: यह संत रामपाल जी महाराज द्वारा दी गई सच्ची भक्ति और प्रार्थना की शक्ति से संभव हुआ। जब मेडिकल साइंस हार मान लेती है, तब पूर्ण परमात्मा की शक्ति काम करती है।

प्रश्न 3: कोई व्यक्ति संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकता है?

उत्तर: आप विभिन्न टीवी चैनलों पर उनका सत्संग देख सकते हैं। सत्संग के दौरान स्क्रीन पर एक पीली पट्टी चलती है, जिस पर दिए गए नंबरों पर संपर्क करके आप अपने नज़दीकी नामदान केंद्र का पता लगाकर निःशुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।

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