आत्महत्या करने वाली टीचर को सपने में मिले भगवान, ठीक हुआ थर्ड स्टेज का कैंसर: ओडिशा की सच्ची कहानी

आत्महत्या करने वाली टीचर को सपने में मिले भगवान, ठीक हुआ थर्ड स्टेज का कैंसर: ओडिशा की सच्ची कहानी

जब जीवन में हर तरफ अंधेरा छा जाए, अपने भी साथ छोड़ जाएं और भगवान से भी भरोसा उठ जाए, तब इंसान के पास क्या बचता है? ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले की एक सरकारी हाई स्कूल टीचर, शिल्या दासी जी के जीवन में एक ऐसा ही मोड़ आया था, जब उन्होंने अपनी ज़िंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया था।

लेकिन यह कहानी अंत की नहीं, एक नई शुरुआत की है। यह कहानी एक ऐसी भक्त की है जिसकी आखिरी पुकार सुनकर स्वयं परमात्मा सपने में आए और उसे उस गुरु का रास्ता दिखाया जिसने न केवल उसे जीवनदान दिया, बल्कि थर्ड स्टेज के कैंसर जैसी बीमारी से भी मुक्त किया।

आप शिल्या जी की पूरी कहानी, उन्हीं की ज़ुबानी सुनने के लिए नीचे दिया गया वीडियो देख सकते हैं।

जब भगवान से उठ गया था भरोसा

संत रामपाल जी महाराज से जुड़ने से पहले शिल्या जी शिवजी और दुर्गा जी की बहुत भक्ति करती थीं। लेकिन उनके जीवन में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

  • माँ की मृत्यु का सदमा: 20 अप्रैल 2017 को उनकी माँ की मृत्यु हो गई, जिससे वह पूरी तरह टूट गईं।
  • आर्थिक और शारीरिक संकट: घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी और उनका खुद का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं रहता था।

शिल्या जी बताती हैं, “मैं अत्यंत दुखी हो गई थी। मेरा भगवान पर से भरोसा उठ गया था। मैंने फैसला कर लिया कि मैं आत्महत्या कर लूँगी।”

एक आखिरी पुकार और परमात्मा का दिव्य सपना

आत्महत्या करने से ठीक पहले, शिल्या जी के मन में एक विचार आया, “क्या इन 33 करोड़ देवी-देवताओं से भी ऊपर कोई परमेश्वर है?” उन्होंने रोते हुए उसी परम शक्ति को पुकारा, “अगर आप हैं, तो मुझे रास्ता दिखाइए, वरना तीन दिन में मैं आत्महत्या कर लूँगी और मेरा विश्वास आप पर से हमेशा के लिए उठ जाएगा।”

उस रात भूखे-प्यासे रोते हुए जब वह सोईं, तो चमत्कार हुआ।

  • पहला सपना: स्वयं परमेश्वर सपने में आए और बोले, “बेटा, मैं ज़िंदा हूँ। मैं तुझे ढूँढ रहा हूँ और तू मुझे ढूँढ रही है।”
  • दूसरा सपना: कुछ दिन बाद जब वह फिर निराश हुईं, तो परमात्मा दोबारा सपने में आए और संत रामपाल जी महाराज का स्वरूप दिखाकर बोले, “देख ले, मैं इस रूप में दुनिया में आया हूँ। मुझे खोजकर दिखा।”

सपने से हकीकत तक का सफर

इस सपने के बाद शिल्या जी ने ठान लिया कि वह इस गुरु को ढूँढकर रहेंगी। उन्होंने टीवी पर चैनल बदलना शुरू किया और जैसे ही साधना चैनल लगाया, उनके सामने वही चेहरा था जो उन्होंने सपने में देखा था – संत रामपाल जी महाराज।

वह बताती हैं, “मैं चकित रह गई! हे भगवान, यह मेरा भगवान है! मुझे जल्द से जल्द इनकी शरण में जाना है।” उन्होंने तुरंत टीवी पर चल रही पट्टी से नंबर लेकर संपर्क किया, “ज्ञान गंगा” पुस्तक मंगवाई और 6 अप्रैल 2018 को नाम दीक्षा ले ली।

भक्ति से मिले अनगिनत लाभ

नाम दीक्षा लेने के बाद शिल्या जी का जीवन पूरी तरह बदल गया।

1. थर्ड स्टेज के कैंसर से मिली मुक्ति

उनके पेट में ट्यूमर था, जो जाँच में थर्ड स्टेज का कैंसर निकला। स्थानीय डॉक्टरों ने उन्हें कटक या भुवनेश्वर जैसे बड़े हस्पताल जाने को कहा। शिल्या जी ने संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना की कि उनका ऑपरेशन पास के ही हस्पताल में सफल हो जाए। गुरुजी की दया से उनका ऑपरेशन वहीं सफल हुआ और आज वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।

2. मनचाही जगह पर मिली नौकरी

उन्हें पहले अपने घर से बहुत दूर एक डिस्ट्रिक्ट में नौकरी मिली थी। उन्होंने गुरुजी से पास में नौकरी के लिए अर्जी लगाई और केवल पाँच महीने के अंदर उनका ट्रांसफर उनके अपने ही जिले में हो गया।

आज वह आर्थिक, मानसिक और आध्यात्मिक, हर तरह से एक सुखी जीवन जी रही हैं।

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शिल्या जी की तरह, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज जी की भक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व बदलाव महसूस किए हैं। ऐसी ही और सच्ची और प्रेरणादायक कहानियों को पढ़ने के लिए, हमारी वेबसाइट Satruestory.com पर ज़रूर जाएँ।

FAQ

प्रश्न 1: शिल्या दासी जी ने आत्महत्या का फैसला क्यों किया था?

उत्तर: अपनी माँ की मृत्यु, खराब आर्थिक स्थिति और शारीरिक कष्टों से वह इतनी निराश हो चुकी थीं कि उनका भगवान पर से विश्वास उठ गया था और उन्होंने जीवन समाप्त करने का निर्णय ले लिया था।

प्रश्न 2: उन्हें संत रामपाल जी महाराज के बारे में कैसे पता चला?

उत्तर: जब उन्होंने आत्महत्या से पहले एक परम शक्ति को पुकारा, तो स्वयं परमात्मा ने उन्हें सपने में दो बार दर्शन दिए और संत रामपाल जी महाराज का स्वरूप दिखाकर उन्हें खोजने का आदेश दिया, जिन्हें बाद में उन्होंने टीवी पर पहचान लिया।

प्रश्न 3: क्या भक्ति से उनकी थर्ड स्टेज की कैंसर की बीमारी ठीक हो गई?

उत्तर: जी हाँ, शिल्या जी के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज से प्रार्थना करने के बाद ही उनका ऑपरेशन स्थानीय हस्पताल में सफलतापूर्वक संभव हुआ और आज वह पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

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