अरुण यादव की सच्ची कहानी: क्या पूर्ण परमात्मा की भक्ति से आर्थिक तंगी और शारीरिक बीमारियां खत्म हो सकती हैं? आज की यह कहानी बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले अरुण यादव जी की है, जिन्होंने न केवल 7 लाख रुपये के भारी कर्जे से मुक्ति पाई, बल्कि अपने परिवार को लाइलाज बीमारियों से भी बचाया।
यह कहानी श्रद्धा, विश्वास और संत रामपाल जी महाराज द्वारा बताए गए सतभक्ति मार्ग के चमत्कारों का जीता-जागता प्रमाण है।
गलत साधना से सही मार्ग तक का सफर
अरुण यादव, जो कि त्रिवेणीगंज, सुपौल (बिहार) के निवासी हैं, शुरू से ही धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने से पहले वे ‘संत मत’ और ‘रामानंदी पंथ’ से जुड़े हुए थे। वे वही पुरानी साधनाएं कर रहे थे जो उनके पूर्वज करते आ रहे थे, लेकिन उन्हें कोई आध्यात्मिक या भौतिक लाभ नहीं मिल रहा था।
उनके जीवन में बदलाव तब आया जब उनके गाँव के एक भक्त विवेक दास ने उन्हें “कबीर परमेश्वर” नामक पुस्तक दी। उस पुस्तक को पढ़कर अरुण यादव को महसूस हुआ कि सच्चा ज्ञान और सच्चा संत अगर कहीं है, तो वो यही है। आखिरकार, 09-07-2017 को उन्होंने नाम दीक्षा ले ली।
संघर्ष और परीक्षा की घड़ी
दीक्षा लेने के बाद का सफर आसान नहीं था। शुरू में उनके पिता ने इसका विरोध किया, जिससे परेशान होकर अरुण यादव काम करने के लिए पंजाब चले गए। वहां वे ‘साधना चैनल’ पर सत्संग और शिष्यों के इंटरव्यू देखते थे।
तभी घर से खबर आई कि उनकी पत्नी बहुत गंभीर रूप से बीमार हो गई हैं। हालत इतनी खराब थी कि उन्हें पंजाब छोड़कर वापस आना पड़ रहा था। अरुण यादव को डर था कि समाज ताने मारेगा कि पत्नी के लिए काम छोड़कर आ गया।
पत्नी की बीमारी और पहला चमत्कार
निराशा के उस दौर में उन्होंने साधना चैनल पर चल रही पीली पट्टी पर दिए गए नंबर पर कॉल किया। उन्होंने अपनी समस्या बताई कि “मैं दीक्षित हूँ, लेकिन मेरी पत्नी नहीं, और वह बहुत बीमार है। क्या उसे लाभ मिलेगा?”
वहां से सेवादारों ने बताया कि अगर वह संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेने का संकल्प लें, तो परमात्मा कृपा कर सकते हैं। अरुण यादव ने अपनी पत्नी को फोन पर समझाया। उनकी पत्नी को कमर में इतना भयानक दर्द था कि वह करवट भी नहीं बदल पाती थीं।
पत्नी ने संत रामपाल जी महाराज के फोटो के आगे दंडवत प्रणाम किया और संकल्प लिया कि “हे गुरुदेव! अगर मुझे इस दर्द से आराम मिल गया, तो मैं भी नाम दीक्षा ले लूंगी।”
हैरानी की बात यह थी कि संकल्प लेते ही उनका कमर दर्द पूरी तरह गायब हो गया। यह अरुण यादव के लिए पहला साक्षात प्रमाण था कि संत रामपाल जी महाराज ही पूर्ण परमात्मा हैं।
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पूरा परिवार आया शरण में: बीमारियों से मिली मुक्ति
इस चमत्कार को देखने के बाद, जब अरुण यादव घर लौटे, तो उन्हें ब्रह्मपुरा आश्रम ले जाने लगे। उनकी भक्ति और बदलाव को देखकर उनकी माँ और बच्चे भी तैयार हो गए। पूरे परिवार ने नाम दीक्षा ले ली। इसके बाद जो हुआ, वह मेडिकल साइंस के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था:
- सांस की बीमारी: अरुण जी को सांस की बीमारी (दमा जैसी समस्या) थी, जिसे डॉक्टरों ने लाइलाज और जीवन भर रहने वाली बीमारी बताया था। भक्ति करने से यह पूरी तरह ठीक हो गई।
- टीबी (TB): उन्हें टीबी की शिकायत थी, वह भी जड़ से खत्म हो गई।
- निमोनिया: उनकी बड़ी बेटी को निमोनिया था, जिसे ठीक होने में लंबा वक्त लगने वाला था, लेकिन सतभक्ति से वह शीघ्र स्वस्थ हो गई।
- लिकोरिया: उनकी पत्नी को लिकोरिया की पुरानी बीमारी थी। एलोपैथी और होम्योपैथी के महंगे इलाज फेल हो चुके थे। दीक्षा लेने के मात्र एक महीने बाद यह बीमारी बिना दवा के ठीक हो गई।
7 लाख का कर्जा हुआ माफ
शारीरिक कष्टों के अलावा, अरुण यादव आर्थिक रूप से बहुत दबे हुए थे। उनके ऊपर 7 लाख रुपये का भारी कर्जा था। इसे चुकाने के लिए उन्होंने बहुत हाथ-पांव मारे थे, लेकिन कर्जा कम होने का नाम नहीं ले रहा था।
संत रामपाल जी महाराज की शरण में आने के बाद, स्थितियां अपने आप बदलने लगीं। अरुण यादव बताते हैं, “मुझे खुद पता नहीं चला कि वो 7 लाख का कर्जा कैसे उतर गया। बड़ी बात यह है कि अब मुझे पहले की तरह हाड़-तोड़ मेहनत भी नहीं करनी पड़ती, फिर भी बरकत बनी हुई है।”
निष्कर्ष
अरुण यादव का जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब इंसान सच्चे मन से पूर्ण संत की शरण में जाता है, तो उसके शारीरिक, मानसिक और आर्थिक दुख खत्म हो जाते हैं। आज वे त्रिवेणीगंज में अपने परिवार के साथ सुखी जीवन जी रहे हैं।
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अरुण यादव जी की तरह ही, हज़ारों लोगों ने संत रामपाल जी महाराज की सतभक्ति से अपने जीवन में अभूतपूर्व और चमत्कारी बदलाव महसूस किए हैं। उनके सिर से 7 लाख का भारी कर्जा उतरना और पत्नी की वर्षों पुरानी बीमारी का बिना इलाज ठीक होना यह प्रमाणित करता है कि पूर्ण परमात्मा की भक्ति से हर असंभव कार्य संभव हो सकता है।
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FAQ: अरुण यादव की सच्ची कहानी
प्रश्न 1: संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा कैसे ले सकते हैं?
उत्तर: आप साधना चैनल या सत्संग के दौरान टीवी पर दिखाए गए नंबरों पर संपर्क करके अपने नजदीकी आश्रम का पता कर सकते हैं और वहां से नि:शुल्क नाम दीक्षा ले सकते हैं।
प्रश्न 2: क्या भक्ति करने से आर्थिक समस्याएं या कर्जा दूर हो सकता है?
उत्तर: जी हाँ, अरुण यादव के अनुभव के अनुसार, मर्यादा में रहकर सतभक्ति करने से परमात्मा अनावश्यक खर्चों को रोकते हैं और रोजगार में बरकत देते हैं, जिससे कर्जा उतर जाता है।
प्रश्न 3: अरुण यादव को किस पुस्तक से प्रेरणा मिली थी?
उत्तर: उन्हें “कबीर परमेश्वर” नामक पुस्तक पढ़ने को मिली थी, जिसे पढ़कर उन्हें सच्चे ज्ञान की प्राप्ति हुई और उन्होंने संत रामपाल जी महाराज की शरण ली।

